जैन समाचार

बड़े भक्ति भाव से 23 वे तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक मनाया।

ज़ूम ऐप्प के माध्यम से 650 परिवारों ने की शाश्वतराज सम्मेद शिखरजी की वंदना।
ahinsa kranti news
सनावद:-जैन धर्म के अनुसार श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ जी का मोक्ष कल्याणक व मुकुट सष्टमी पर्व अति उत्साह व भक्तिभाव से मनाया गया। श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में चातुर्मासरत डॉ. आचार्य श्री 108 प्रणाम सागर जी महाराज के सानिध्य में भगवान पार्श्वनाथ जी का पंचामृत अभिषेक कर विशेष पूजा-अर्चना, शांतिधारा कर निर्वाण लाडू चढ़ाया गया।
सन्मति जैन काका ने बताया की अगली कड़ी में मंदिर जी मे चातुर्मासरत आचार्य प्रणाम सागर जी महाराज ने अपने उध्बोधन में कहा की जैन धर्म के अनुसार जिसका मोक्ष हो जाता है उसका मनुष्य भव में जन्म लेना सार्थक हो जाता है। जब तक संसार है तब तक चिंता रहती है, जहां मोक्ष का पूर्णरूपेण क्षय हो जाता है वहीं मोक्ष हो जाता है।
प्रभु का स्पर्श तो हमें स्वर्ण ही नहीं पारस बना देता है। हम भी पार्श्व प्रभु की तरह अपने भवों को कम करके निर्वाण प्राप्ति की ओर बढ़ें। अत: तेईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याण पर शिखरजी क्षेत्र की पूजा व निर्वाण कांड का पाठ करने के पश्चात निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। निर्माण लाड़ू चढ़ाने शोभाग्य रेखा राकेश कुमार जैन सनावद परिवार को मिला।व शान्ति धारा करने का शोभाग्य आचार्य श्री की संगस्ता ब्रमचारी श्रीमति निर्मला बाई जी को प्राप्त हूवा।जिस प्रकार यह लाडू रस भरी बूंदी से निर्मित किया जाता है, उसी प्रकार अंतरंग से आत्मा की प्रीति रस से भरी हो जाए तो परमात्मा बनने में देर नहीं लगती।
इस मोके पर जैन समाज की बालिकाओ ने सामूहिक रूप से निर्जला उपवास किये, दिन भर पूजन, स्वाध्याय, मनन-चिंतन, सामूहिक प्रतिक्रमण करते हुए संध्या के समय देव-शास्त्र-गुरु की सामूहिक भक्ति प्रश्न मंच करआत्म चिंतन किया। एवम रात्री में संगीतमय आरती भक्ति की गई।
*650 परिवारों ने की भाव वंदना*
भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक व मुकुट सष्टमी के अवशर पर पोरवाड़ सामाजिक मंच के प्रथम प्रयास पर मोबाइल के माध्यम से 650 परिवारों ने ज़ूम ऐप्प के माध्यम से जैनों के शाश्वत तीर्थराज समेद शिखरजी के पहाड़ की वंदना की सर्वप्रथम डॉ. आचार्य श्री 108 प्रणाम सागर जी महाराज ने अपने संछिप्त उदबोधन में शिखरजी की वंदना का महत्व बताया व सबसे आखिर में पार्श्वनाथ भगवान की टोक पर पहुँच कर निर्माण लाड़ू सभी ने अपने घरों में चढ़ाया इस अवशर पर कमल जैन संगीतकार ने शुमधुर भजनों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया इस भाव पूर्ण यात्रा के मुख्य पूर्णाजक व संघ पति बनने का अवशर इंदर चंदजी जैन मण्डलेस्वर परिवार को प्राप्त हूवा।
इस अवशर पर ब्रमचारी नमन भईया,प्रसांत चौधरी,रजत जैन,महेन्द्र मुंसी, पवन धनोते,मुकेश जैन,हेमेंद्र काका,नवनीत जैन, सुनील पावणा,वीरेंद्र बाबा ,जंगलेश जैन, सहित सभी समाज जनों ने उपस्थिती दर्ज करवाई।

Related Articles

Back to top button
Close