जब जब भी आपकी आस्था कमजोर नजर आये तो ऐसे श्री सिद्धचक्र महामंडल जैसे विधान को करके अपने पुण्य को बड़ाते रहना – मुनि श्री सौम्यसागर जी महाराज

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अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर) – तुम तो अविकारी हो प्रभुवर, जग में रहते जग से न्यारे,अतएव झुकें तव-चरणों में, जग के माणिक मोती सारे। तुम-सा दानी क्या कोई हो, जग को दे दीं जग की निधियां, दिन-रात लुटाया करते हो, सम-शम की अविनश्वर मणियाँ उपरोक्त पक्तियां को गुनगुनाते हुये मुनि श्री सौम्यसागर जी महाराज ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तीसरे दिवस कहा कि भक्ती करने से पुण्य बड़ता है, यह आप सभी ने सुना होगा लेकिन हम लोग तो देख रहे है कि जैसे जैसे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान आगे बड़ रहा है, आप लोगों की भक्ती और उस भक्ती से पुण्य भी वड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैसा आप लोग चाहते है, बैसा ही हो रहा है, अतऐव मुट्ठी बंद रखने का समय यानि की आप लोगों ने एकजुट रहने का जो संकल्प था, उसमें आप सभी उत्तीर्ण हो चुके है, अब तो समय उस बंद मुट्ठी को खुला करने का है। दौनों हाथों से अपने घर का दृव्य निकालने का है जिससे आप सभी विदिशा वासिओं का संकल्प शीतलधाम का यह समवसरण मंदिर का लक्ष्य पूर्ण हो सके।

उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में लांकडाउन में कुछ लोगों ने आपकी आस्थाओं को लूटने का प्रयास किया है, कुछ घटनाएं ऐसी भी घटी कि जिनसे उनकी आस्थाओं में कमी आई है, उन्होंने कहा कि अपनी उस आस्था को शव्दों के जाल से लुटने मत दैना, जिनके हाथों में आस्था की पूंजी रहती है, उसका पुण्य कभी क्षींण नही होता। “आस्था की पूंजी से ही शास्ता की पूंजी मिलती है” उन्होंने कहा कि जब जब भी आपकी आस्था कमजोर नजर आये तो ऐसे श्री सिद्धचक्र महामंडल जैसे विधान को करके अपने पुण्य को बड़ाते रहना, प्रभु की भक्ती ही दिशा वोध का कार्य करती है। उन्होंने 2012 में पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के वस्तर छत्तीसगढ़ प्रवास का उदाहरण देते हुये कहा कि नक्सलियों की घटनाओं से वस्तर में कोई मुनिमहाराज का विहार नही होता था। लेकिन जब पूज्य गुरूदेव वस्तर प्रवास पर थे तो कौडा़गांव समाज जो कि मात्र पांच घर की समाज थी उन लोगों की भावना थी कि वंहा पर जैन मंदिर हो जाऐ जिससे वंहा पर लोगों का आना जाना प्रारंभ हो।

उन्होंने पूज्य गुरुदेव से अस्थायी मंदिर का निर्माण का आशीर्वाद मांगा  गुरूदेव ने उनको आशीर्वाद प्रदान करते हुये जनवरी माह में कौडागांव में संघ का सुवह सुवह पहुंचना हुआ। ठंडी के दिन थे प्रतिष्ठित होंने वाली प्रतिमा को गुरूदेव एकटक लगभग ढेड़ घंटे तक निहारते रहे और जब गुरुदेव उस स्थान पर खड़े रहे तो पूरा संघ भी वंहा पर ही खड़ा रहा पुज्य गुरूदेव के निहारने से उस प्रतिमा में कुछ ऐसा अतिशय घटा कि हम लोगों के साथ ऐक और वेदी प्रतिष्ठा की घटना जुड़गयी। बेदी प्रतिष्ठा के पश्चात पड़ोसी गांव का एक व्यक्ती आया कि गुरूदेव हमारे गांव में भी एक जिन मंदिर की स्थापना हो जाऐ। लेकिन मात्र हमारा ही परिवार है और हमारे परिवार में वंहा पर रहने वाला में ही एक पुरुष हुं वाकी सभी पांच छै महिलाऐं है। हम लोगों को दो दिन वाद उसके गांव में पहुचने का था हमने कहा कि आपके लिये एक जिन प्रतिमा की व्यवस्था हो जाऐगी आप अस्थाई मंदिर के निर्माण का संकल्प कर लो और मुझे आप सांयकाल तक वता दैना,में आचार्य श्री से बात कर लूंगा।

मुनि श्री ने कहा कि वह व्यक्ति कोड़ागांव में संकल्प करके गया फिर लौटा नहीं मेंने सोचा शायद उसकी व्यवस्था नहीं हुई होगी। हम सभी लोग दो दिन पश्चात उसके गांव पहुंचे तो मंदिर का निर्माण हो चुका था एवं वेदी भी निर्मित हो गयी थी।बंहा पर भी वेदी प्रतिष्ठा का कार्य संपन्न हुआ। उस व्यक्ति ने हमसे क्षमा मांगते हुये जो हमें जानकारी दी वह जानकारी प्रभु और गुरू के प्रति आस्था को मजवूत करती है। वह बोला कि महाराज जी कोणागांव में भगवान के सामने संकल्प के पश्चात जैसे ही में अपने गांव पहुंचा तो मुझे जानकारी मिली कि हमारे परिवार के सभी चारों सदस्य एक नई कार लेकर आ रहे थे कि उस कार का एक्सीडेंट हो गया महाराज श्री मेरे होशोहवास उड़गये और में तुरंत ही घटना स्थल की ओर पहुंचा वंहा देखा तो कार एक्सीडेंट से वुरी तरह छतिग्रस्त पड़ी थी।परिवार जनों का कोई अता पता नहीं था में वहूत सदमे में था लेकिन न जाने कौनसा पुण्य था या यूं कहो कि उस संकल्प शक्ती का प्रभाव था कि मेरे कानों में मेरे परिवार जनों की आबाज आई पापा… सभी लोग स्वस्थ थे हमने भगवान का शुक्रिया अदा किया।

इस अवसर पर मुनि निश्चलसागर जी महाराज ने  सम्वोधित करते हुये कहा कि जैसे ही दाता के भावों की निर्मलता जुड़ती है,और वह अपने पुण्य को संचय करता है। उन्होंने कहा कि भक्ती के फल में क्यू कमी आती है, उसका कारण है कि आप लोग अपने दृव्य का सही सही उपयोग नहीं करते। यदि आप लोग 2008 से लेकर अभी तक अपने दृव्य का सही से उपयोग किया होता तो अभी तक आपका यह प्रोजेक्ट शीतलधाम का पूर्ण हो जाना चाहिये था। चलिये कोई वात नहीं अब तो पूरी समाज को खुलकर लग जाना चाहिये। उपरोक्त जानकारी प्रदान करते हुये श्री सकल दि. जैनसमाज के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया कि प्रतिदिन 6:15 से प्रतिष्ठाचार्य अविनाश भैयाजी भोपाल के निर्देशन में चल रहा हें मंगलवार को 64 रिद्दी विधान के अर्घ चड़ाऐ जावेंगे। सांयकाल महाआरती 7 वजे से शीतलधाम पर होगी।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा,मध्यप्रदेश
संपर्क – 7828782835/8989696947

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