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जागो, संसार एक स्वपन्न है : विराग सागर महाराज

सवांददाता – सोनल जैन
भिंड,।परम् पूज्य राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी मुनिराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा स्वप्न कच्ची नींद में विशेष आते हैं याद रहते हैं गहरी नींद के याद नहीं रहते आत्मा शाश्वत है शरीर बदला है मृत्यु शरीर की हुई है आत्मा का कवि विनाश नहीं होता यह ज्ञान ही समयक दृष्टि की पहचान है स्वप्न में मृत्यु देखने पर मृत्यु नहीं होती घर अचेतन में चेतन मेरा न य ना है छूटा तो क्या जाएगा परिवार ना आया ना साथ जाएगा
सत्य को विचारे श्रद्धा को निर्मल बनाएं तो समयक दर्शन से मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं यथार्थ श्रद्धा को जगाए आ यथार्थ को विसर्जित कर दें राष्ट्र समाज या देश में रहते हुए हम यह विचार करें कि हमारा जन्म में सेवा भक्ति सहयोग से ही सार्थक हो सकता है बाहर में सबसे हिलमिल कर चलें हीन दुखियो  पर दया करें जियो और जीने दो का भगवान महावीर का विश्व शांति का सूत्र घर-घर में गूंजे यही परम भावना है कोरोना जैसी महामारी के संदर्भ में पूज्य श्री का वक्तव्य तथा शुभ आशीष है कि न छुओ न छूने दो रोग दुर्भिक्ष आदि के नियंत्रण को हम भगवान की विशेष भक्ति करें तथा रोगी मन को सदा प्रसन्न निर्भीक रखें ताकि भारत की स्वस्थता कायम रहे।

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