विधान का अर्थ है उन शक्तियों को आमंत्रित करना जिससे जगत के सभी जीव सुखी और संपन्न रहें – मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज

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अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफदेवांश जैन


विदिशा(भद्दलपुर) – सनातन परंपरा में तीन स्थानों पर लक्ष्मी यंत्र की स्थापना की गई है,उपरोक्त तीनों स्थान बदरीनाथ मंदिर, पदमनाभ मंदिर एवं त्रिपति वालाजी ये तीन पूरे भारत में ऐसे मंदिर है,जो कि शंकराचार्य जी के द्वारा स्थापित है, जंहा पर स्वर्ण आभूषण और हीरे जवाहरात की कोई कमी नहीं है,इन तीनों मंदिरों का पूरे विश्व में प्रभाव है,श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में भी विनायक यंत्र का प्रयोग होता है जो कि रिद्धि, सिद्धी प्रदायक माना गया है,जिसके प्रभाव से रोग, शोक और दारिद्रता दूर होती है।उपरोक्त उदगार मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के अन्तर्गत चतुर्थ दिवस 64 रिद्धि विधान के दिवस व्यक्त किये।उन्होंने कहा कि आज ऋद्धिधारी मुनिओं की आराधना की जिन मुनिराजों के पास से यदि कोई हवा छू कर निकल जाती है तो उस स्थान पर रोग शोक दूर हो जाते है।

उन्होंने कहा कि विधान का अर्थ है उन शक्तियों को आमंत्रित करना जिससे जगत के सभी जीव सुखी और संपन्न रहें, रोग शोक और दरिद्रता से मुक्ती मिले। मुनि श्री ने कहा कि जब किसी विशेष उद्देश्यों को लेकर कोई विधी पूर्वक विधान किया जाता है,तो आपकी मानसिकता और आपके इमोशन पर निश्चित करके फर्क पड़ता है,एवं स्वास्थ और उपचार में लाभ भी होता है। श्री सिद्धचक़ महामंडल विधान कोई साधारण विधान नहीं है, इसके मूल माड़ना मे प्रतिदिन अर्घ समर्पित किये जा रहे है। मुनि श्री ने कहा कि किसी अच्छे उद्देश्य को लेकर के यदि विधान किया जाता है तो उसमें निश्चित करके लाभ होता है। मुनि श्री ने कहा कि विधान के पश्चात अंतिम दिवस हबन किया जाऐगा और उस हवन में आपके पूरे परिवार को साथ में वैठना चाहिये। उन्होंने कहा कि हवनकुण्ड में पूर्णाहुति मंत्रों की शक्ती के साथ जो सामग्री उसमें छोड़ी जाती है,उसके धुंआ के वातावरण से रोग शोक की आहुति भी हो जाती है।

इस अवसर पर मुनि श्री सौम्यसागर जी सहित संघस्थ मुनिराज भी मंचासीन थे। श्री सकल दि. जैन समाज एवं श्री शीतलविहार न्यास के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के अन्तर्गत आज 64 रिद्धि विधान के अर्घ समर्पित किये गये। आज के श्रावक श्रैष्ठी के रुप में समाज के संरक्षक हृदयमोहन जैन ने अपने जन्मदिन के अवसर पर मुनिसंघ को श्री फल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।इस अवसर पर कई महिलाओं और पुरुषों ने आज 64 रिद्दी वृत करने का संकल्प भी लिया।बालवृहम्चारी एवं विधानाचार्य अविनाश भैया भोपाल ने विधान को संपन्न कराते हुये ओम ह्रींम अर्हम असि आ ऊ सा नमाः की चार जाप प्रतिदिन करने का संकल्प उपस्थित पुरूषों और महिलाओं को दिलाते हुये कहा कि जो भी इस जाप को करने का संकल्प प्रतिदिन करने का लेगा उसके जीवन में ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिलेगा।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा,मध्यप्रदेश
संपर्क – 7828782835/8989696947

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