जैन समाचार

झमाझम वारिस के साथ राजगृह के विपुलाचल पर्वत पर मनायी गयी वीरशासन जयंती उत्सव

AHINSA KRANTI NEWS


राजगीर (नालन्दा) :- 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के प्रथम देशना स्थली पर *”वीर शासन जयंती”* आज दिनांक – 06-07-2020 दिन सोमवार को भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुआ । प्रातःकाल वारिस की रिमझिम फुहारों के बीच एवं प्राकृतिक प्रदत्त पेड़ – पौधों की अठखेलियों के बीच विपुलाचल पर पहुँचना बड़ा ही आनन्द दायक रहा ।

यह वही जगह है जहाँ भगवान महावीर की प्रथम वाणी खिरी थी तथा “जिओ और जीने दो” का अमर सन्देश पुरे विश्व को दिया था ।विदित हो कि वैशाख शुक्ल दशमी को ऋजुकुला नदी के तट पर 12 वर्षो की कठोर तपस्या के पश्चात् भगवान महावीर को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई थी । भगवान के प्रथम देशना के लिए समोशरण की रचना इन्द्र द्वारा की गई थी परन्तु 66 दिनों तक भगवान महावीर की वाणी नही खिरी क्योंकि उस वाणी को समझने वाला कोई नही था । तब इंद्र ने इंद्रभूति गौतम नामक प्रकाण्ड विद्वान को भगवान महावीर के पास ले आये । गगनचुंबी रत्नमयी मानस्तंभ को देखते ही इंद्रभूति गौतम का मान भंग हो गया । इंद्रभूति गौतम के दो भाई अग्निभूति, वायुभूति सभी के साथ 500 – 500 शिष्यों ने भगवान महावीर से दीक्षा ली तथा प्रथम गणधर इंद्रभूति गौतम कहलाये ।

तत्पश्चात् भगवान महावीर ने प्रातःकाल के समय अभिजित नक्षत्र में दिव्य ध्वनी के द्वारा शासन परम्परा चलाने के लिए उपदेश दिया और चतुर्विध संघ की स्थापना की । इस घटना को धर्मचक्र परिवर्तन के रूप में भी जाना जाता है और इसी दिन से भगवान महावीर का शासन शुरू हुआ इसी की याद में हम आज भी “वीर शासन जयंती” मनाते है । यह हमारा सौभाग्य है कि वीर प्रभु के शासन में जीवन यापन कर रहे है ।विपुलाचल पर्वत पर स्थित भगवान महावीर की लाल पाषाण से निर्मित चौमुखी प्रतिमा बर्बश ही तीर्थ यात्रियों को आकर्षित करती है । वीरशासन जयंती के पावन अवसर पर दिगम्बर जैन अनुयायियों ने मंदिरों में मांगलिक क्रियाओं के साथ जिनेन्द्र देव का पूजन किया, तथा विपुलाचल पर्वत की शिखर पर स्थित चातुर्मुखी प्रतिमा, धर्मशाला मंदिर, वीरशासन धाम तीर्थ, लालमन्दिर आदि जगहों पर अष्ट द्रव्य जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, दीप, धूप, फल और अर्घ की थाल सजाकर संगीतमय पूजा अर्चना के साथ महामस्तकाभिषेक कर देवशास्त्र गुरु की पूजा, चौबीसी पूजा, निर्वाण क्षेत्र पूजा, एवं वीरशासन जयंती की पूजा करके मंगल आरती हुई तथा क्षमा प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ ।

संध्या समय धर्मशाला मन्दिर में मंगल आरती तथा संध्या भजन का आयोजन हुआ । कार्यक्रम के पुण्यार्जक श्री आदित्य जैन, रोहणी (दिल्ली), श्री ज्ञानचंद जैन (राजगीर), श्री रतन लाल भंवर लाल जी जैन, गोरेगांव (मुम्बई) वालों ने फेसबुक लाइव के माध्यम से घर बैठे प्रभु भक्ति का आनंद लिया।*पंचपहाड़ी प्रबंधक संजीत जैन ने कहा कि -* आज के परिवेश में मानव अपने जीवन में सुख और शांति चाहता हैं तो उसे भगवान महावीर स्वामी के बताए मार्ग पर चलना होगा, उसे महावीर भगवान के आदर्शों व संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करना होगा। वीर शासन जयंती पर हम सब संकल्प लें कि भगवान महावीर स्वामी के बताए आदर्शों व संस्कारों को जीवन में उताकर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा आज सम्पूर्ण विश्व कोरोना जैसे खतरनाक वायरस की चपेट में है मंदिरों में ताले खुलने के पश्चात भी लोग घरों में  ही रहना पसंद कर रहे है। प्राकृतिक आपदा भी साथ नही छोड़ रही। सम्पूर्ण मानव जाति आज अपने आप को असुरक्षित मान रहा है।वीरशासन जयंती के मौके पर राजगृही जी सिद्ध क्षेत्र के सभी अधिकारीगण, महिलाये, बच्चे तथा स्थानीय जैन समाज मौजूद हुए।

Related Articles

Back to top button
Close