जैन समाचार

जैन धर्म में योग की परंपरा

AHINSA KRANTI NEWS

सीकर दिनांक 21 जून 2020 21 जून को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है 21 जून 2015 से योग को वैश्विक पहचान प्राप्त हुई यह अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का छठा वर्ष है परंतु हम इस बार वैश्विक महामारी कोरोना कोविड-19  की चपेट में है इस वर्ष सभी परिवारों ने घर में रहकर डिजिटल माध्यम से योग दिवस का आनंद उठाया है अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जैन परंपरा में योग का क्या स्थान है इस विषय से रूबरू करते हैं प्रियंक कुमार जैन ने बताया कि जैन परंपरा का आधार प्राचीन वैदिक संस्कृति है तथापि नि:संदेह कहां जा सकता है जैन संप्रदाय द्वारा परिवर्तित योग विद्या का अनुसरण कर अनेक  जैन आचार्यो ने निर्वाण की प्राप्ति की है यह तथ्य प्रसिद्ध जैन आचार्य कुंदकुंद स्वामी की कृति “नियमसार” के इस कथन से प्रमाणित हो जाता है

प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव से लेकर 24 वे अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी सभी तीर्थंकर प्रतिमाएं योग आसन में ही मिलती है जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जीवन चरित्र योग का ज्वलंत उदाहरण है इन्होंने पूर्व जन्मों में संस्कार वंश, युवावस्था में ही विरक्त होकर, गृह त्याग करके तपस्या करते हुए 12 वर्ष से अधिक समय तक मौन धारण करके अत्यंत कठोर तप का अनुसरण कर योगाभ्यास द्वारा आत्मज्ञान को प्राप्त कर निर्वाण पद को प्राप्त किया इस प्रकार उपयुक्त उदाहरण से स्पष्ट होता है कि जैन धर्म में भी योग विद्या का स्वरूप किसी न किसी रूप में अवश्य प्राप्त होता है

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