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हर एक कषाय में आत्मा की तबाही मचाने की ताकत : आचार्य भव्यदर्शन सुरीश्वर म.सा

अहिंसा क्रांति / दलीचंद श्रीश्रीमाल
मैसूरु : 18 जुलाई 2020 सुमतिनाथ जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ के तत्वावधान में महावीर भवन में चातुर्मास कर रहे आचार्य भव्यदर्शन सूरीश्वर ने धर्म संदेश देते हुए कहा कि जैन शास्त्र लाखों की संख्या में मौजूद हैं l उनमे से 45 को आगम की संज्ञा दी गई l एक काल में 84 आगम थे l कई नष्ट होने के कारण अब 45 आगम बचे हैं l उन आगमो मे कर्म, पाप, दुख से बचाव हेतु बहुत बाते बताई गई हैं l  कष यानी संसार ….आय यानी लाभ l जिससे संसार की वृद्धि होती हैं l
उसे कषाय कहते हैं l यह चार प्रकार के होते हैं l क्रोध, मान, माया, लोभ l हर एक कषाय में आत्मा की तबाही मचाने की ताकत है l अगर आपको इस तबाही नाम से बचना है तो कषाय से दूर ही रहना होगा l कषायो के निमित्त तो बहुत सारे मिलेंगे l निमितो को निष्फल बनाने में बुद्धि का उपयोग किया तो हम कामयाब हो जाएंगे l ऐसे में अगर चारों कथाओ का फल समझना है तो शास्त्रकार लिखते हैं क्रोध  प्रीति का नाश करने वाला है l मान का कार्य विनयमान के गुण का नाश करना है l माया मैत्री में दरार खड़ी करती हैं l लोभ सर्वनाश करता है l
पार्श्व पद्मावती ट्रस्ट के अध्यक्ष दलीचंद श्रीश्रीमाल ने बताया कि मैसूर में कोरोना कर मामले बढ़ते हुए वापस कुछ दिनों के लिए लॉक डाउन किया गया है , लॉक डाउन के पश्चात भी लोग घर बैठे चातुर्मास के दौरान धर्म आराधना कर रहे है, कोरोना से मुक्ति के लिए प्रभु से प्राथना कर रहे है।

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