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जिस पद्धति में अहिंसा और वीतरागता की पुष्टी होती है वह पंथ ही सर्वश्रेष्ठ है -मुनि श्री समता सागर जी महाराज

 

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति / ब्यूरो चीफ देवांश जैन
विदिशा(भद्दलपुर) – “धर्म वही श्रैष्ठ माना जाता है, जंहा अहिंसा को प्रधानता दी जाती है “जैन धर्म प्रारंभ काल से ही अहिंसा और वीतरागता का पोषक रहा है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री समता सागर जी महाराज ने जैन तत्व वोध से जैन धर्म का इतिहास पर जिज्ञासुओं के समाधान में कहे।
उन्होंने कहा कि पूजा की विभिन्न पद्धतियां विशेष परिस्थितियों और समय काल में दोष आने से प्रारंभ हुई, लेकिन उन्ही पद्धतियों को उन विशेष व्यक्तिओं और उनके मानने वालों ने आगे वड़ाया और वह उसी पंथ के कहलाऐ।
हालांकि सभी एक मत से भगवान आदिनाथ से लेकर भगवान महावीर आदि चौवीस तीर्थकंरों को ही मानने वाले थे अंतर सिर्फ इतना था कि किसी ने उनको वस्त्रादि के साथ श्रंगार करके पूजा तो किसी ने उनकी निर्ग्रंथ अवस्था को पूजा और इसीलिये समय काल वीतता गया एवं नये नये पंथो की स्थापना और उसके मानने वाले वड़ते चले गये।
इसी श्रंखला में दिगंबर और स्वेताम्बर पंथ की स्थापना हुई और स्वेताम्बर में भी स्थानक और मूर्ती पूजक दौनों प्रथा है। तथा दिगंबरों मे भट्टारक प्रथा, तेरह पंथ, वीस पंथ, तथा तारण स्वामी ने एक नया पंथ चलाया जो कि मूर्ती के स्थान पर शास्त्रों को प्रमुखता दी जिसका नाम आगे चलकर तारणपंथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ जिसके मानने वाले मध्यप्रदेश में वहुतायत से है, हालांकि वह सभी दिगंबर साधुओं को भी मानते है।
१९ वी शताब्दी में एक और नयी विचारधारा जो कि  सोनगढ़ विचारधारा के नाम से सामने आयी। हालांकि सभी पंथ दिगंबर प्रथा के ही पोषक रहे, लेकिन पूजन पद्धति विभिन्न विचारधाराओं और उनके मानने वालों ने परिवर्तन करके अलग अलग रखी, और अपनी अपनी पूजन पद्धतिओं का पोषण करके आगे वड़ाते रहे।
 उपरोक्त संद्रभ में आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज से जब एक वार किसी श्रावक ने पूंछा कि महाराज आप कौनसे पंथ को मानते है, एवं कौनसा पंथ श्रैष्ठ है? तो उन्होंने हंसकर कहा कि “जिस पद्धति में अहिंसा और वीतरागता की पुष्टी होती है वह पंथ ही सर्वश्रेष्ठ है”।
श्री शीतल विहार न्यास के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया आज मुनि श्री के दर्शन करने इन्दौर रेवती रेंज से परम श्रद्धेय वाल ब्र. श्री सुनील भैयाजी एवं दीपक भैयाजी पधारे उन्होंने सभी को सूचना दी कि इन्दौर में विराजमान परम पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के स्वास्थ्य में निरंतर सुधार है। आज आहार चर्या के पहले प्रातःकालीन वेला में वह मंचासीन भी हुये।
ज्ञातव्य रहे विगत कुछ दिनों से आचार्य श्री का स्वास्थ्य कुछ ठीक नहीं चल रहा था उसे लेकर विदिशा में विराजमान मुनि श्री समता सागर जी महाराज एवं ऐलक श्री निश्चयसागर जी महाराज भी चिंतित थे एवं प्रतिदिन वर्रों वाले वड़े वावा भगवान श्री आदिनाथ के समक्ष मुनि श्री के मुखारविंद से वृहद शांतिमंत्रों से गुरुदेव के स्वास्थ को लेकर शांतिधारा भी की जा रही थी।
आचार्य श्री की स्वस्थता का समाचार सुना तो संपूर्ण विदिशा नगर में खुशी की लहर डूव गया। इस अवसर पर श्री शीतलधाम एवं न्यास के अध्यक्ष वसंत जैन ने आदरणीय भैयाजी का न्यास की ओर से भाव भीना अभिनंदन कर आभार प्रगट किया।
 इस अवसर पर न्यास के सदस्य ए. एल फणींस, महामंत्री सनत जैन टाईल्स वाले, पं. महेन्द्र जी, मुकेश जैन वड़ाघर, अमित जैन मधुवन, राजेश जैन जनरल, डा. शोभा जैन,  शैलेष जैन एडवोकेट,  आदि उपस्थित थे। मुनिसंघ शीतलधाम पर ही सप्ताहांत तक विराजमान रहेंगे। एवं यंही पर संघ की आहार चर्या संपन्न हो रही है।
~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश
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