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विचारों को प्रवाह दैने के लिये संतों का नगर आगमन होता है-मुनि श्री समता सागर जी महाराज

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर) – जाम यदि सड़क पर लगता है, तो वह यातायात को अवरुद्ध कर देता है, शरीर के रक्त प्रवाह पर यदि जाम लगता है, तो वह हमारे सारे शरीर को अस्वस्थ कर देता है, शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिये शुद्ध खान पान रखना आवश्यक है, अभक्ष्य और फास्टफूड एवं मादक पदार्थ अंडा मछली आदि मांसाहारी पदार्थ आपकी सेहत को खराब करते है,

वंही फास्टफूड, पीजा वर्गर ब्रैड,विस्कुट आदि का सेवन हमारे शरीर की पाचन शक्ती एवं रक्त के प्रवाह को एवं अंदर के सिस्टम को खराब कर रक्त वाहनिओं में जाम लगा देते है,जैसे जीवन के प्रवाह को वनाए रखने के लिये स्वस्थ विचारों का होंना आवश्यक है,उसी प्रकार शरीर को स्वस्थ और निरोग रखने के लिये उचित एवं संतुलित खान पान आवश्यक है।

उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने श्री शांतिनाथ जिनालय सराफ जी के मंदिर विदिशा में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि संसार में कोई भी क्यों न हो हर व्यक्ती सुख और शांती को चाहता है, पहला सुख निरोगी काया यदि आपका शरीर स्वस्थ्य है, तो आपका मन प्रसन्न रहेगा मन प्रसन्न है तो विचार भी अच्छे रहेंगे।

मुनि श्री ने कहा कि खान पान के नियंत्रण से आपका शरीर आपका स्वास्थ आपके विचारों पर फर्क पड़ता है। अच्छे मन के लिये अच्छे स्वास्थ्य का होंना आवश्यक है।अच्छे स्वास्थ्य से अच्छे विचारों का आवागमन होता हैं,उन्होंने कहा कि “विचार हीन व्यक्ति चेतना शून्य माना जाता है, उन्होंने कहा विचारों को प्रवाह दैने के लिये संतों का नगर आगमन होता है, और उनका धर्मोपदेश प्रमुख निमित्त कारण वनता है, जो हमारी चेतना को झंकरित कर  कर नये विचारों को जन्म देती है।

उन्होने कहा कि संत के धर्मोपदेश से अज्ञानी मिथ्यादृष्टि जीव जिसमें मनुष्य और त्रियंच दौनों शामिल है,  सम्यक् दर्शन प्राप्त हो जाते हैं। उन्होंने धर्मोपदेश का महत्व वताते हुये कहा कि जैसे शांत सरोवर में एक कंकर  फैकने से हलचल पैदा हो जाती है, उसी प्रकार धर्मोपदेश से एवं विचारों के आदान प्रदान से जीवन को नई दिशा और दशा दौनों मिल जाती है। 

मुनि श्री ने कहा कि  देव शास्त्र और गुरू सम्यक् दर्शन के प्रमुख निमित्त है, और मोक्ष मार्ग की प्रथम सीड़ी है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों जिनालयों के दर्शन का जो क्रम प्रारंभ हुआ था आज नवे दिन श्री शांतिनाथ जिनालय में समापन की ओर है। उन्होंने कहा कि संगति से जीवन में प्रवाह आता है, वंही कु संगति से जीवन में जाम लग जाता है।

उन्होंने लांकडाउन की चर्चा करते हुये कहा कि पिछले दिनों लांकडाउन के चलते आप लोग जंहा के तंहा कैद होकर रह गये थे और वाहर की स्वस्थ हवा के लिये हाथ पांव की जकड़न मिटाने के लिये यंहा वंहा घूमने के लिये इच्छा होती थी लेकिन उन इच्छाओं पर अंकुश लगाना पड़ता था

उसी प्रकार जव विचारों पर अंकुश लग जाता है, तो व्यक्ती परेशान हो उठता है, इसलिये विचारों की स्वतंत्रता आवश्यक है। जैसे शरीर को स्वस्थ रखने के लिये श्रम आवश्यक है, उसी प्रकार विचारों में चिंतन के लिये धर्मोपदेश आवश्यक है। गुरुओं का आगमन से परिणामों में विशुद्धि वनती है और उन विशुद्ध परिणामों से समाज को नई    उर्जा मिलती है।

इस अवसर पर ऐलक श्री निश्चय सागर जी महाराज एवं क्षु. श्री ध्यान भूषण जी महाराज भी मंचासीन थे। प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया आज प्रातःकालीन वेला में शांतिधारा सराफ जी के मंदिर में हुई। एवं मुनिसंघ के प्रवचन के पूर्व आचार्य श्री की संगीतमय पूजन ब्र. श्री अनुप भैयाजी, एवं राजेश जैन (जनरल) के संयोजन में संपन्न हुई।

2,3,,जुलाई गुरुवार से शुक्रवार तक मुनि संघ के प्रवचन प्रातःकालीन वेला में 8:15 से श्री शांतिनाथ जिनालय स्टेशन जैन मंदिर में होंगे। एवं दौपहर की कक्षा 3:30 से4:30 तक मूलाचार की लगेगी। 4:45 पर मुनिसंघ की अरिहंत विहार वापसी होगी।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

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