जैन समाचार

शिक्षा का उद्देश्य डिग्री प्राप्त करना नहीं चरित्र निर्माण करना है:आचार्य  ज्ञानसागर  

            युवा वर्ग संस्कार कार्यशाला का आयोजन
AHINSA KRANTI / AMIT JAIN
बारां.।  श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन नसिया बारा राजस्थान मैं युवा वर्ग संस्कार कार्यशाला के माध्यम आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने अपने पीयूष वाणी द्वारा कहा कि इस देश की अपनी अनेक विशेषताएं हैं इस देश को सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता है । इस देश में जब राम महावीर थे उस समय घी और दूध की नदियां बहती  थी उस समय प्रातः काल से ही सभी प्रभु का स्मरण करते थे सोने से पहले भी प्रभु का नाम लेकर सोते थे पर आज बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि उसी धरा पर प्रातः काल हो नहीं पाता।  प्रभु का नाम लेना भूल जाता है।
यह वह देश है जहां श्रवण कुमार जैसे पुत्रों ने अपने अंधे माता पिता को चारों धाम की यात्रा करवाई यह वह देश है जहां लक्ष्मण जैसे भाई हुए जिन्होंने राम जैसे भाई  का वनवास काल में साथ दिया यह वह देश है जहां सीता जैसी पत्नी ने कष्टों में अपने पति के आगे रही।  कितनों ने देशभक्ति का परिचय देकर अपने जीवन का बलिदान कर दिया आप सभी युवकों से भी अपेक्षा है कि आप सभी श्रवण  कुमार राम सीता हनुमान महावीर जैसे बन कर अपने जीवन को महान बनाएं क्योंकि शिक्षा का उद्देश्य मात्र डिग्री प्राप्त करना नहीं होना चाहिए शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण करना है।  संस्कार का शंखनाद करना है जीवन में सत्य निष्ठा चरित्र मिश्र कर्तव्यनिष्ठ की ज्योति जलाना है। जीवन को व्यसन मुक्त बनाना है।
उन्होंने कहा कि भौतिक साधनों के अति प्रयोग से दूर रहना है। आप सभी के उन्नत कंधों पर ही इस देश का भविष्य टिका है अतः आप सभी की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है आज जो राम सीता श्री कृष्ण महावीर हनुमान जैसे महान पुरुष नहीं थे हम और आप को ही राम सीता महावीर जैसा बनना होगा। जब भी कोई परिस्थिति आए उसका सामना करें शहर से धैर्य रखें निराश ना हो। युवा वह है जो विपरीत परिस्थितियों के मध्य भी मुस्कुराते रहते हैं। कोरोना महामारी के मध्य भयभीत ना हो साहस धैर्य रखें अपने पड़ोसी पड़ोसियों को भी साहस बनाए हां सावधानी अवश्य रखें। गर्म पानी का प्रयोग करें वस्त्रों को शुद्ध खान पीन को शुद्ध रखें फास्ट फूड आदि का प्रयोग ना करें प्राकृतिक भोजन करें शासन प्रशासन के नियमों का पालन करें।
जैन समाज के प्रवक्ता अनिल बड़जात्या ने बताया कि आचार्य श्री के मुख वाणी से जैन समाज के हर वर्ग को  ज्ञान एवं धर्म कि अनुभूति प्राप्त हो रही है.। ये बारां जैन समाज का सौभाग्य है। आचार्य श्री बताते है कि जब मिट्टी संस्कारित हो जाती है तो वह उसी स्थान पर पाती है। जब सोना तप जाता है संस्कारित हो जाता है। तभी वह आपके गले की कानों की शोभा बढ़ाता है। लोहा जब तप जाता है संस्कारित हो जाता है तभी वह घरो की सुरक्षा करता है। जब अचेतन पदार्थ संस्कारित होने पर आपके लिए उपयोगी होते हैं तो आप तो चैतन्य भाव से सहित हैं आप अगर संस्कारित हो जाओगे तो अवश्य ही जीवन चमक जाएगा।
जीवन रूपी सिक्के का मूल्य संस्कारों की मुहर से ही बढ़ता है आप सभी के माता पिता दादा दादी के द्वारा दिए गए संस्कारों का यह प्रभाव है कि आप यहां आए हैं। संस्कारों का जीवन मैं बहुत महत्व है आप सभी से अपेक्षा है कि आप सभी अतिथि संस्कार करें बड़ों को सम्मान दें।  देव शास्त्री गुरुओं के पास जाकर जीवन को आदर्श मय बनाएं। मोबाइल आदि का दुरुपयोग न करें टीवी देखते हुए भोजन न करें।

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