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गुरु के बिना जीवन की शुरुआत नहीं-साध्वी कमल प्रभा

AHINSA KRANTI NEWS

नागौर-श्री वर्द्धमान स्थानक श्रावक संघ नागौर में के समता भवन में श्री मिश्रीमल जी “मधुकर” की सुशिष्या साध्वी कमल प्रभा श्री जी म.सा.आदि ठाणा 4चात्तुर्मास हेतु विराजमान हैं।चात्तुर्मासिक धर्म सभा को संबोधित करते जैन साध्वी ने कहा कि आज गुरु पूर्णिमा एवं चातुर्मास का स्थापना दिवस है। लेकिन सद्गुरु का योग मिलना दुर्लभ है।

गुरु एक कारीगर के समान होते हैं जिस प्रकार कारीगर पत्थरों को गडकर मकान बनाने के योग्य बनाता है।उसी प्रकार गुरु कारीगर के समान अपने वचनों से शिष्यों को गड़कर एक योग्य शिष्य बना देते हैं। साध्वी ने कहा कि आप गुरु के दरबार में किस लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि आप गुरु के पास में ज्ञान पाने के लिए ही जाते होंज्ञान पाने के पहली शर्त यह कि मनुष्य के जीवन में विनय होना चाहिए। जबतक मनुष्य के जीवन में अंहकार रहेगा तबतक ज्ञान नहीं पा सकते हैं। 

इसी अवसर पर साध्वी लब्धी प्रभा ने कहा कि बिना पानी के नदी बेकार है उसी प्रकार अतिथि के बिना आंगन बेकार है इस प्रकार मनुष्य के जीवन में गुरु ना हो तो मनुष्य जीवन बेकार है। महावीर नहाटाने बताया कि रोजाना सुबह 6-30 प्रार्थना,सुबह 9 बजे प्रवचन, शाम को प्रतिक्रमण,एंव 11घंटे नवकार महामंत्र का जाप  निरंतर हों रहें हैं।इस अवसर पर रिखबचंद नाहटा, महावीर चंद, राजेंद्र कुमार चौरड़िया, नरेंद्र संखलेचा, सम्पर्त,कमल,‌छीमु ललवानी एवं जैन समाज के स्त्री-पुरूष एवं बच्चे मौजूद थे।

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