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पंडित रतनलाल जी बैनाड़ा का निधन, समाज मे शोक की लहर

AHINSA KRANTI NEWS

जयपुर। आज देश के प्रमुख्य विद्वान, करणानुयोग के मर्मज्ञ,परम गुरुभक्त पंडित रतनलाल जी बैनाड़ा साहब* का स्वर्गवास 16 अगस्त की प्रातःकाल 9 बजे हो गया है।जैनधर्म के प्रकाण्ड विद्वान आदरणीय बैनाड़ा जी जैसे विद्वान का जैन जगत में अनूठा योगदान रहा।कहते है कोई व्यक्ति एक साथ *लक्ष्मी एवं सरस्वती पुत्र* नही होता लेकिन बैनाड़ा जी दोनों से समन्वित थे।इतना ही नहीं गुरु परम्परा में *ज्ञान और चारित्र के बेजोड़ संगम* रहे।अहंकार तो जिनको दूर दूर तक न था।अति सहज, सरल सादगी पूर्ण जीवन जिनका रहा,साथ ही आज जगह जगह जो हम जिनशासन की सेवा में समर्पित विद्वान देखते है वह आदरणीय बैनाड़ा जी की ही देन है।आपने पुत्रवत *सांगानेर संस्थान* का परिपालन किया है।

जगह जगह *धार्मिक शिविरों* के आयोजन की परंपरा आपसे जीवंत हो उठी, *बच्चे बच्चे जिनधर्म के आश्वादन* से भरपूर होने लगे।संसार मे तो न जाने कितने प्राणी जन्म लेकर मरण करते है लेकिन बैनाड़ा जी जैसे सुयोग्य पुत्र को पाकर जैन संस्कृति भी धन्य हो उठी। *आचार्य श्री विद्यासागर जी जैसे गुरु एवं पूज्यवर मुनिपुंगव सुधासागर जी* के मार्गदर्शन में आपने जैन दर्शन में चार चांद लगा दिए, गुरु कृपा आप पर तो सदैव से रही।आपके सदैव से रहे अत्यंत शुभ परिणाम बताते है कि निश्चित ही आपने श्रेष्ठ गति का वरण किया है।सम्पूर्ण जैन समाज के लिए आपके स्थान की क्षतिपूर्ति कर पाना असंभव है।

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