जैन समाचार

आ.श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज का 31 वा आचार्य पधारोहण भक्ति भाव से मनाया

AHINSA KRANTI NEWS

सनावद:- जो कठिन होता है वही सरल होता है। जब कोई शिखरजी की यात्रा करता है तो उसे लगता है कि यात्रा बहुत कठिन है पर जब वह पहाड़ की ओर पहला कदम बढ़ाता है तो उसे कठिनाई कम लगती है ओर थोड़ा चलता है तो ओर सरलता हो जाती है ओर इसी प्रकार भक्त पूरी वंदना कर लेता है। उसी प्रकार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महारज की चर्या व चरित्र है उनकी दिनचर्या बहूत ही कठिन है पर जब उनसे कोई दर्शन कर लेता है तो वो बहूत ही अपने आप को धन्य मान लेता है।।उक्त उद्गार आचार्य श्री 108 डॉ. प्रमाण सागर जी महाराज ने सनवाद नगर के गौरव आचार्य रत्न श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज के 31 वे आचार्य पधारोहण दिवस के अवशर पर कहे ।

सन्मति जैन ने बताया की इस अवशर पर राजकुमारी बाई व मनुबहनजी व मंजुला भूच के द्वारा आचार्य वर्धमान सागर जी के चित्र के समक्ष दीप प्रजलन किया व मंगला चरण प्रांशुल पंचोलिया ने किया व सभी समाजजनों आचार्य श्री का सामूहिक पूजन भी किया।आचार्य श्री ने कहा की वो बहूत ही सरल सहज स्वभावी है जैसा उन्हें उपाधी दी है वात्सल्य की उनके स्वभाव भी बहूत ही वात्सल्य वारिधी है। आज तारीख 24 है हमारे तीर्थंकर 24 है हमने महावीर तीर्थंकर को तो नहीं देखा महावीर स्वामी का जीवन किस प्रकार का रहा वह नहीं देखा लेकिन आज हमने वर्तमान मे वर्धमान सागर के जीवन को जीवंत देखा है आज साक्षात चारित्र चक्रवर्ती 20 वी सदी के प्रथमआचार्य शान्ति सागर जी के चरित्र को चरितार्थ कर पूरे विश्व मे वो उनकी परम्परा का निर्वहनकर रहे है एक ऐसी शान एक ऐसी विभूति जिन्होंने एक नहीं दो नहीं तीन तीन बार बाहुबली भगवान के महा मस्तकाभिषेक करवाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है ।

लोग एक बार जाने को तरसते हैं कि एक बार गोमटेश्वर बाहुबली भगवानके दर्शन हो जाए लेकिन जब भी इतिहास लिखा जाएगा जब जब बाहुबली भगवान के साथ आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का नाम भी लिखा जाएगा। एक ऐसे आचार्य जिन्होंने एक साथ तीन-तीन बार भगवान बाहुबली केपंचकल्याणक महा मस्तकाभिषेक कराने का सौभाग्य प्राप्त किया है।

ऐसे आचार्य का गुणगान करना अतिशयोक्ति नही होंगी।जैसा की सभी को ज्ञात है की आज से 30 वर्ष पूर्वआज ही के दिन24 जून1990 को पारशोला राजस्थान में आचार्य श्री 108 अजीत सागर जी महाराज के द्वारा प्रदान किया गया था।इस अवशर पर संगीता पाटोदी, विजया जैन व बेबी पुण्या जैन भी अपनी गुरु के प्रति विनियंजली प्रकट की। अंत मे सभी समाजजनों ने आचार्य श्रीडॉ. प्रमाण सागर जी महारज को वर्षायोग हेतु श्री फल समर्पित किया। संचालन प्रसांत चौधरी ने किया। व शाम को आचार्य श्री की 31 दीपो से आरती की गई।इस अवशर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।

Related Articles

Back to top button
Close