जैन समाचार

भगवान पारसनाथ का निर्वाण महामहोत्सव बड़े ही धूम धाम से मनाया

AHINSA KRANTI / SONAL JAIN
भिंड। भगवान पारसनाथ के निर्वाण  महोत्सव पर परम पूज्य राष्ट्र संत गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज ने कहा भगवान पारसनाथ की प्रतिमा पूजा चालीसा मंत्र मंदिर क्षेत्र सर्वाधिक हैं क्योंकि जिन पर संकट पर विजय आपत्ति विपत्ति में अचल रहने वाले ही पूजे जाते हैं हम जरा सी विपत्ति में घबरा जाते हैं पारसनाथ 10 भवो तक क मट का घनघोर उपसर्ग सहते रहे एक बार पार्श्वनाथ चरित्र पढ़ने पर सदा सदा आपकी विपत्ति दूर हो जाएगी निर्माण लाडू चढ़ाना सार्थक हो जाएगा हिंदू संप्रदाय में राम की पूजा होती है क्योंकि 14 वर्ष वनवास में रहकर भी मर्यादा ए नहीं तोड़ी पुरुषार्थ से पीछे नहीं हटना चाहिए ]
संकट परीक्षा उपलब्धि प्रदान करते हैं विपत्ति माला लिए तैयार है लेकिन कायर के लिए नहीं पुरुषार्थी के लिए कमठ ने अंत में पारसनाथ की सरण ली धरनेड्र पद्मावती ने उपसर्ग दूर किया अंत में पारसनाथ का संबोशरण लगा महावृत्ति अनुवर्ती आदि बनकर उद्धार किया मुनि अवस्था में उपसर्ग का एहसास नहीं आत्मानंद में उतर कर देखा आज का पवित्र मेला में उन्हें निर्माण हुआ लाडू चढ़ा कर हम भी यही प्रार्थना करते हैं कि वह मोक्ष मुझे भी प्राप्त हो मीठा आनंद शांति का प्रतीक माना जाता है भगवान पारसनाथ सर्वांग आत्म प्रदेशों से अनंत सुकून थे ऐसो आराम में आप देव शास्त्र गुरु को नहीं बुलाती भूलते धर्म की यह कल्पना सदैव सदैव फलता फूलता रहे कष्ट तकलीफ रोग बीमारी दूर हो जाएं सुबह से दुकान नहीं खोलो भगवान के द्वार से खोलो यदि यहां आ गए तो दुनिया हाथ जोड़े गी सुख द्वार पर आकर खड़ा रहेगा शांति द्वार खटखटआएगी ।
१-मोक्ष सप्तमी के दिन प्रथम 30 किलोग्राम के निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य श्री राष्ट्रीय विराग युवा मंच के सदस्यों को प्राप्त हुआ तथा से 23 परिवारों द्वारा भी 23लाडु चढ़ाए गए
२-शांति धारा का सौभाग्य बच्ची लाल जी जैन दिल्ली पवन कुमार जी जैन अडोखर बालों को सौभाग्य मिला।

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