प्रशंसा के भूखे योग्यता से कंगाल होते है – मुनि श्री सौम्य सागर जी महाराज

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अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा – एक किसान समयोचित समय में जब योग्य वीज को योग्य खाद पानी के साथ वो देता है,तो जब वह अंकुरित होता है तो अपने माथे पर लगी माटी को हटाते हुये वह ऊर्धगामी होता है, उसी प्रकार जो ऊर्धगामी योग्यता को रखते है,वह कभी प्रशंसा को नहीं चाहते। अक्सर देखा जाता है कि प्रशंसा से भूखे योग्यता से कंगाल हुआ करते है, उसी प्रकार यह जीव योग्य वातावरण पाकर अनगनित सम्भावनाएं पैदा कर लेता है। उपरोक्त उदगार मुनि श्री सौम्य सागर जी महाराज ने अरिहंत विहार जैन मंदिर में प्रातःकालीन प्रवचन सभा में व्यक्त किये। मुनि श्री ने उदाहरण देते हुये कहा कि वी एम डव्लू जैसी उच्च कींमती गाड़ियों के एडवाइजमेंट क्यों नहीं आते जो करोड़ की गाड़ी बेचता है वह उन गाड़ियों का भी विज्ञापन कर सकता है। उसका कारण यह है कि जिसको यह गाड़ी लैना है,उनके पास इतना समय ही नहीं है जो कि एडवाइजमेंट देखें? उन्होंने कहा कि “प्रशंसा के भूखे योग्यता से कंगाल होते है” उन्होंने कहा कि  रागी और वैरागी में यही अंतर हुआ करता है, रागी प्रशंसा को चाहता है,जबकि वैरागी प्रशंसा से दूर रहता है। मुनि श्री ने कहा कि प्रशंसा एक ऐसी काई (फिसलन) है जो कि आपको नीचे गिराकर ही दम लेती है!मुनि श्री ने कहा की जब आप शिखर पर पहुंचते है तो वंहा पर स्थान कम होता है,और यदि उस समय आप लापरवाह हो गये तो  संतुलन टूटने में देर नहीं लगती। ऐसे ही जब आपकी योग्यता चरम पर होती है,तो आपके आसपास प्रशंसकों का जमावाड़ा लग जाता है, और यदि उस समय यदि आप उनके वहाव में वह गये तो नीचे आने में भी देर नहीं लगती।आचार्य गुरूदेव मूक माटी में कह रहे है कि “रहस्य में पड़ी हुई बात को आस्था की नासा और अनुपान से ही स्वीकार किया जा सकता है।उन्होंने आयुर्वेद में अनुपान की बात करते हुये कहा कि योग्य अनुपान से यदि औषधी ली जाती है,तो वह लाभ करती है, उसी प्रकार आस्था की पूंजी जिसके जीवन में रहती है वह गरीब होकर के भी मालामाल होता है। मुनि श्री ने कहा कि वर्तमान समय में मिशनरी के स्कुल जो चल रहे है उससे हमारे बच्चों की आस्था से कंगाल करते चले जा रहे है। उपरोक्त जानकारी देते हुये प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया कि धनतेरस के दिन दौपहर को मुनिसंघ का विहार शीतलधाम की ओर हुआ एवं सांयकालीन गुरुभक्ति शीतलधाम पर संपन्न हुई।३ नवम्वर वुद्ववार को मुनिसंघ के प्रवचन एवं आहार चर्या शीतलधाम पर ही होगी। 4 नवम्वर गुरुवार को भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण महोत्सव एवं गौतमस्वामी कैवल्यज्ञान महोत्सव दीपावली त्योहार अरिहंत विहार जैन मंदिर में मनाया जाऐगा।५ नवम्वर सुक्रवार के प्रवचन तथा आहार चर्या अरहंत विहार में ही संपन्न होगी। ६ नवम्वर शनिवार एवं ७ नवम्वर रविवार को शीतलधाम में चातुर्मास कलश वितरण कार्यक्रम संपन्न होगा।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा,मध्यप्रदेश
संपर्क – 7828782835/8989696947

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