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प्रभु प्राप्ति समर्पित भाव से ही संभव है। आचार्य मणिप्रभ। 

AHINSA KRANTI NEWS
मांडवला 20 जुलाई 2020
जीवन का लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति राग द्वेष से मुक्ति, छलरहित व्यक्तित्व और वाणी में मधुरता का भाव रखे बिना संभव नहीं है। बाहर के कोलाहल से मुक्त रहकर अंतर्मन में स्वयं को पहचानकर उत्कंठ भावों से अंतर्तत्त्व को पाने के लिए पुरूषार्थ आवश्यक है। हमें परमात्मा का प्रेम, उनका स्पर्ष और असीम शांति को पाने के लिए स्वयं के बांसुरीवत बनकर समर्पित होना पड़ेगा। आचार्यश्री ने कहा कि परमात्मा के अधरों का स्पर्श पाने स्वयं को बांसुरी की तरह अपने आराध्य के प्रति समर्पित करना होगा।
श्री जिनकांतिसागरसूरि स्मारक ट्रस्ट एवं जहाज मंदिर चातुर्मास समिति-2020 द्वारा आयोजित चातुर्मास के अंतर्गत हुए जहाज मंदिर परिसर के प्रवचन हॉल में आयोजित पूज्य खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभु प्राप्ति समर्पित भाव से ही संभव है। जीवन को बांसुरी की तरह तीन गुणों से युक्त करें, उसे गाँठ रहित कर मोह माया और ज्ञान के अहंकार की समाप्ति और वाणी की मधुरता से युक्त कर बांसुरीवत जीवन को प्रभु चरणों में समर्पित कर ही हम परमात्मा को पा सकते है।
बांसुरी के तीसरे भाव ‘‘मधुरता’’ पर चर्चा करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि हम जब भी बोले अंतर्मन से बोले, सदैव मीठा बोले। वचनों में कटुता का भाव अंतर्मन में भी नहीं होना चाहिए। कटुता का भाव रखकर कुछ न बोलना मौन नहीं है। हमारे विचारों और अंतर्भावनाओं का प्रत्यक्ष प्रभाव हमारी आँखों और चेहरे पर उभरते हुए तनावों से प्रकट होता है। कटुता का त्याग मन, वचन और कर्म तीनों में समान रूप से होना आवश्यक है।
आचार्य जिनमनोज्ञसूरीश्वर महाराज ने धर्मसभा के प्रारंभ में संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपने जीवन को सार्थकता की ओर ले जाने और जीवन लक्ष्य को पाने के लिए अपने व्यक्ति को संवारना चाहिए। अपने व्यक्तित्व को हम कितना सुंदर बना पाएंगे यह हमारी अपनी जिम्मेदारी है। दैनिक जीवन में दूसरों को किसी भी रूप में पीड़ा न पहुंचाने का संस्कार विकसित कर हम स्वयं को और दूसरों को भी शांति अहसास करा सकते है। वचनों की मधुरता हमें न केवल एक-दूसरे से जोड़ती है अपितु आत्मषांति से हमें परिपूर्ण कर दूसरों को भी शांति प्रदान करती है जीवन सौन्दर्य का प्रसार संस्कारों के माध्यम से ही संभव हो कर प्रभावी बनता है।
प्रवचन श्रृंखला में आचार्यश्री का प्रतिदिन प्रवचन सुबह 9.30 से होगा। सभा में चातुर्मासिक दिनचर्या की घोषणा के अनुसार स्वाध्याय कक्षा, 10.30 बजे से संस्कृत कक्षा आदि होंगे।
प्रवचन में पारसमल बरडिया, सूरजमल देवडा धोका, मुकेश प्रजापत आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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