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धर्म आदि सारे विषयों का ज्ञान जैन ग्रंथो में मौजूद है : आचार्य भव्यदर्शन सुरीश्वर

AHINSA KRANTI NEWS
मैसूरु : सुमतिनाथ जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ के तत्वावधान में महावीर भवन में चातुर्मासार्थ विराजित आचार्य भव्यदर्शन सूरीश्वर ने धर्म संदेश देते हुए कहा कि अनंत ज्ञानी ऐसे तीर्थकर भगवंतो ने जगत को बनाने का ही काम नहीं किया अपितु जगत का वास्तविक दर्शन कराने का यानी बनाने का काम किया है l संपूर्ण जगत का चर अचर सृष्टि का संचालन कैसे होता है इसकी पूरी जानकारी जैन शास्त्रों में निहित है  l अपनी छिछली बुद्धि में वह ज्ञान न उतरे तो बात अलग है l
समग्र विश्व में होने वाले परिवर्तनों के रहस्य जैन शास्त्रों में दिखाए हैं l जैन श्वेतांबरीय 45 आगमो में संपूर्ण तत्व ज्ञान है l खगोल, भूगोल, ज्योतिष, इतिहास, समाज, स्वर्ग, नरक, मोक्ष, पुनर्जन्म,ध्यान योग, अध्यात्म, गोचर, अगोचर, विश्व जीव, जड़, मंत्र विद्या, कर्म, धर्म आदि सारे विषयों का ज्ञान जैन ग्रंथो में मौजूद है l बहुत कुछ शास्त्रों का विनाश होने पर भी अभी तक बहुत बचा हुआ है l पूरी जिंदगी अध्ययन करते रहने पर भी वह पढ़ाई पूरी नहीं होगी l आश्चर्य तो इस बात का है कि तीर्थकर भगवान अपने गणधर शिष्य को मात्र उप्पनेइ वा, विगमेइ वा, धुवेइ वा, ऎसे तीन पद ही देते हैं l लेकिन प्रभु की कृपा से गणधर भगवंतो की आत्मा मे ज्ञान का ऐसा सहयोग पर आम हो जाता है कि मात्र 48 मिनट में समय में ही खर्च खर्च संख्या प्रमाण श्लोकों की रचना वाली द्वादशांगी की रचना वे कर लेते हैं l और भी हैरान करने वाली बात तो यह कि जितने गणधर भगवंत होते हैं द्वादशांगी के अर्थ एक ही होते हैं l तब तो जैन धर्म महान प्राचीन और जीवंत धर्म हैं l वेद पुराण आदि मे भी जैन तीर्थकर भगवंतो की स्तुति है l

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