जैन समाचार

जैन श्रावक-श्राविकाएं अब घर बैठे कर सकेंगे स्वाध्याय

जैन समणी वृंद ने यू-ट्यूब चैनल पर किया अपलोड
AHINSA KRANTI NEWS
जैन धर्मावलंबियों के लिए स्वाध्याय को साधना का परम अंग माना गया है। कोरोना के चलते संत-सतियों के सानिध्य में उपाश्रय जाना मुमकिन नहीं है। ऐसे में जिन श्रावक-श्राविकाओं को आगम वाणी कंठस्थ नहीं है या आगम भाषा- प्राकृत या अर्धमागधी नहीं पढ़नी आती है, उनके लिए स्वाध्याय करना मुश्किल सा हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन स्वाध्याय अपलोड किया गया है।
जयगच्छाधिपति आचार्य पार्श्वचंद्र महाराज के अंतेवासी डॉ.पदमचंद्र महाराज की सुशिष्या जैन समणी डॉ.सुयशनिधि ने अपने यू-ट्यूब चैनल पर दशवैकालिक सूत्र के 4 अध्ययन को अपलोड किया है। इससे अब जैन श्रावक-श्राविकाएं घर बैठे स्वाध्याय कर सकेंगे। साथ ही विश्व भर के लोग भी जैन समणी के यू-ट्यूब चैनल से स्वाध्याय का लाभ ले सकेंगे। इस कार्य में जैन समणी सुयोगनिधि का भी सहयोग रहा। जैन समणी डॉ.सुयशनिधि ने बताया कि आगम जैन साहित्य की अनमोल निधि और उपलब्धि है। दशवैकालिक सूत्र एक उत्कालिक सूत्र है। जिसे अस्वाध्याय के 32 कारणों को टालकर कभी भी पढ़ा जा सकता है। यह मूल सूत्र भी है, जिसका अध्ययन सर्वप्रथम आवश्यक माना गया है। समय-समय पर आगम वाणी को अपने यू-ट्यूब चैनल पर प्रसारित करने की बात डॉ.समणी ने कही।

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