जैन प्रवचन jain pravchanजैन समाचार

सत्य की खोज के लिए निष्पक्ष होना ज़रूरी है : आचार्य भव्यदर्शन सूरीश्वर म. सा

ब्यूरो चीफ – दलीचंद श्रीश्रीमाल
मैसूर । 5 अगस्त 2020 श्री सुमतिनाथ जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के तत्त्वावधान में महावीर भवन में चातुर्मास बिराजित आचार्य भव्यदर्शन सूरीश्वर तथा साध्वी भद्रिकाश्रीजी म. ने धर्म संदेश मे बताया कि – भगवान महावीर ने अपनी अंतिम देशना में कहा – ‘अप्पाणा सच्चमेसेज्जा।’ मतलब – आप स्वयं ही सत्य का अन्वेषण करें । सत्य की खोज खुद को ही करनी चाहिए । इसका मतलब ये हुआ कि – सत्य ऐसे ही सहज नहीं मितला । सत्य के लिए बहुत कुछ परिश्रम उठाना पड़ता है । सत्य की प्राप्ति के लिए समय-शक्ति-बुद्धि-परिभ्रमण सब कुछ करना पड़ता है । सिद्धर्षि ने सत्य की खोज और सत्य का निर्णय करने के लिए 21 बौद्ध और जैन गुरुओं के पास चक्कर काटें । तब निर्णय पर आयें कि सत्य किसके पक्ष में है । कईं बार तो वर्षो बीतने पर भी सत्य हाथ में नहीं आता ।
एक मिट्टी का मटका खरीदना है तो भी कितनी जाँच-पड़ताल करते हो ? कितने टकोरे लगाकर चैक करते हो ? छोटी की चीज़ के लिए जब इतनी मेहनत करनी पड़ती है, करते हो तब तत्त्व का निर्णय करने के लिए कितना श्रम उठाना पड़ेगा ?
असत्य का पक्ष अगर गलती से भी हाथ लग गया तो आत्मा न जाने अनंत काल तक दुर्गति की गहरी गर्ता में चली जाती है । असत्य-सत्य के बीज सत्यका चयन करना अच्छे-अच्छे बुद्धिशाली जीवों के लिए भी दुष्कर हो जाता है । असत्य और सत्य की पहचान के लिए भी दुष्कर हो जाता है । असत्य और सत्य की पहचान के लिए आपके पास ऐसी बुद्धि चाहिए । बुद्धि में ही त्रुटि है तो आपके लिए असत्य-सत्य का दूध-पानी जैसा पृथक्करण करना नामुमकिन जैसा हो जायेगा । बुद्धि के साथ जानकारी ज्ञान होना अनिवार्य है । जानकारी के अभाव में आप ठगे जाओंगे ।
सत्य की खोज के लिए निष्पक्ष होना ज़रूरी है । पक्षपात वाला, किसी के मत से पकड़ा-जकड़ा जीव-मानव असत्य को छोड़कर सत्य की समझ आने पर भी सत्य का स्वीकार करने को तैयार नहीं होगा ।
सब लोग, सब मतवालें अपने-अपने विचारों की सच्चाई का दावा करते रहतें है । कभी कोर्ट में उपस्थित दोनों पक्ष सही नहीं होते है । वो ही न्याय यहाँ भी लागू होता है । भगवान ने कहा-आप स्वयं ही निष्पक्ष होकर-बुद्धि-दिमाग का पूरा इस्तेमाल करके सत्य की खोज करो-अन्वेषण करों । ज़रूर सत्य की प्राप्ति होगी । हताश होने की ज़रूरत नहीं है । सकारात्मक सोच के साथ आगें बढ़े ।

Related Articles

Back to top button
Close