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भारतीय संस्कृति स्वं ही साधना और शांतिप्रिय संस्कृति रही है-मुनि श्री समता सागर जी महाराज

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

साँची(विदिशा)”ऋतु और मौसम के अनुसार अषाढ़ का महिना चलता है, जैसे अषाढ के महिने में की गई महनत एक किसान के लिये वहूत महत्वपूर्ण होती है, जो कि उसके साल भर काम आती है, ठीक उसी तरह से धर्म के क्षेत्र में श्रद्धालुओं को अषाढ़ का महिना वहूत महत्वपूर्ण है।

भारतीय संस्कृति स्वं ही साधना और शांतिप्रिय संस्कृति रही है। अषाढ़ का महिना और श्रावण में शास्त्रीय विधी विधान से साधू जन इन माहों पर विशेष ध्यान देते है, जिसका लाभ पूरी समाज को मिलता है।

उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में घट रही घटनाओं का जिकर करते हुये कहा कि शांति प्रिय देश और शांतिप्रिय समाज कभी भी अतिक्रमण को पसंद नहीं करते लेकिन यदि कोई उन पर अतिक्रमण या आकृमण करे तो उस देश को अपनी सीमा की सुरक्षा के आवश्यक कदम भी उठाना पड़ते है।

“अहिंसा के सिद्धांत में जितना महत्व जिओ और जीने दो का है उतना ही महत्व व्यव्हारिक जीवन में रहो और रहने दो का है” उन्होंने कहा कि विश्व में सभी राष्ट्र अपनी सीमाओं की सुरक्षा अपनी अपनी सीमाओ में रह कर करें।कोई भी किसी की सीमाओं पर अतिक्रमण न करे।

उन्होंने अहिंसा को एक वहूत वड़ा शस्त्र वताते हुये एवं राष्ट्रीय भावनाओं के महत्व को दर्शाते हुये कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिये संत समाज भी निरंतर उन मंत्रों की जाप दे रहे है, जिससे संपूर्ण विश्व में शांति का वातावरण वना रहे। उन्होंने कहा कि आजकोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को परेशान किया है, इसलिये इस महामारी से छुटकारा पाने के लिये सभी को अपना अपना वचाव करना भी जरूरी हे,सभी को अपनी अपनी सुरक्षा करनी है।

उन्होंने खानपान में शुद्धता के महत्व को दर्शाते हुये कहा कि वर्तमान में अभी तक इस वीमारी से वचने के लिये कोई भी वैक्सीन नहीं वनी है लेकिन खान पान की शुद्धता तुम्हारी सवसे वड़ी वैक्सीन है।यही तुम्हारे जीवन की ढाल है, जो भी आचार विचार और खान पान की नियम संयम की इस वैक्सीन  अपनाएगा वह अपने जीवन की रक्षा कर सकेगा एवं स्वस्थ तथा प्रसन्न रहेगा।

उन्होंने आज के सांची के प्रवास के संद्रभ में कहा कि सांची में वौद्ध और पुरातत्व का विशेष महत्व है, और ऐसे स्थान पर सांची की जैन समाज ने भगवान श्री शीतलनाथ स्वामी के मंदिर का निर्माण किया।वह सभी आशीर्वाद के पात्र है।

उन्होंने कहा कि 20 साल पहले इस मंदिर के पंचकल्याणक आचार्य श्री की आज्ञा से  संपन्न कराये थे। उन्होंने याद करते हुये कहा कि प्रकाश जैन  जिन्होंने मंदिर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमीका निभाई थी उनके परिवार को वहूत वहूत आशीर्वाद प्रदान किया।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

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