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संयोग वियोग हांनि लाभ तो नियति की परणति है, इसे उसी रुप में मानकर स्वीकार करो-मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति/ब्यूरो चीफ देवांश जैन

सागर- जब तक पुराने पत्ते नहीं झड़ते तब तक नये पत्ते नही आते यही सृष्टि की व्यवस्था है और संसार का चक्र है, अतः संसार के संयोग और वियोग में चिन्तित मत हो, नफा और नुकसान में विचलित मत हो,

उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कोरोना के डर से वहूत  लोग चिंतित है, किसी को भविष्य की आर्थिक पीडा़ सता रही है, तो किसी को अपने परिजनों का वियोग सता रहा हैं।

मुनि श्री ने कहा कि यह संयोग वियोग हांनि लाभ तो नियति की परणति है, इसे उसी रुप में मानकर स्वीकार करो। उन्होंने कहा कि आत्मा तो अजर अमर अविनाशी है, इसका उस हांनी और लाभ से कोई सम्वंध नहीं हैं, संसार में अमर होकर कोई भी नहीं आया है, फिर इस संयोग और वियोग का दुःख कैसा?

मुनि श्री ने कहा कि संसार को एक रंगमंच मानो और इसमें हम सभी एक अभिनय ही तो कर रहे है, उस अभिनय से अपनी आत्मा को प्रभावित मत होंने दैना। उन्होंने कहा कि जो अपने आत्म तत्व को जान लोगे तो आपके अंदर सहनशीलता आ जाएगी, और मुश्किल से मुशिकल हालात में आप टूट नहीं पाओगे।

उन्होंने कहा कि व्यापार में हांनि लाभ  ऊपर की चीजें है उन सभी से अपने आपको परे मानो। जैसे एक वेंक में  प्रतिदिन लाखों रुपये जमा करता है और लाखों रुपये कोई निकालता है तो वंहा का प्रवंधक हर्ष और विषाद नहीं करता उसी प्रकार भगवान महावीर कहते हें कि सांसारिक लाभ और हांनी में हर्ष और विषाद मत करो समझो हमारा था क्या?

उन्होंने कहा कि जो जीवन के यथार्थ को जान लेताहै वह हांनी और लाभ में सहज दृष्टी रखता है, और यह सहज दृष्टि उसी को प्राप्त होती है जो कि आत्मदृष्टि रखता हैं।उन्होंने कहा कि धन संपत्ति से अपने आपको ऊपर मानो इस वाहरी संपत्ति को अपने ऊपर हांवी मत होंने दो। आई तो ठीक और नही आई तो भी ठीक।

जैसे मान लीजिये कोई लाखों रुपया आपके पास धरोहर के रुप में रख कर जाता है उसको दैनै में आपको कोई कष्ट नही होता उसी प्रकार जो आपको मिला है उसे प्रभू की धरोहर मानकर उसकी रक्षा करोगे तो उसके जाने के पश्चात आपको दुःख नही होगा।”फील्ड में जो लोग जन सेवा के कार्य कर रहे है, उन सभी का हमें आभार मानना चाहिये। हम सभी का कर्तव्य है, कि हम सभी सपोर्ट करें हमारी सोच नकारात्मक के स्थान पर सकारात्मक होंना चाहिये।

श्री सकल दि. जैन समाज विदिशा के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया जरूरत मंद लोगों के लिये जैन समाज द्वारा संचालित भोजनशाला में  आज आठ सौ लोगों के लिये भोजन के पैकैट तैयार किये गये।

जिसका वितरण प्रतिदिन शासन के सहयोग से एवं प्रेस फोटोग्राफर एवं केमरा मेंन की मदद से सीधे जरूरत मंद लोगो तक पहुंचाने की व्यवस्था चल रही है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि विदिशा नगर में कोई ही व्यक्ति भूखा न रहे।

इस वितरण कार्य में शासन प्रशासन और प्रेस फोटोग्राफरों का हमें पूरा सहयोग मिल रहा है। हम लोग तो वास्तव में अपने अपने घरों में कैद हो गये है लेकिन फील्ड में वही हमारे पुलिस के जवान है, जो कि आम जन मानस के वीच पहुंच रहे है, यदि वह सख्ती करते है, तो किसके लिये?  हमारे और आपके जीवन को वचाने के लिये ही कर रहे है,

इसलिये हमारा आपका भी कर्तव्य है कि अपने घर से न निकलें और पुलिस प्रशासन को सहयोग दें। यदि आवश्यक कार्य से निकलना पड़े तो पुलिस प्रशासन से अनुमति ले लें।

चौराहे चौराहे और आपके मौहल्ले में आकर यदि कोई जानकारी मांगते हैं तो एक अच्छे नागरिक की तरह उनको प्रेम से जानकारी दें और आवश्यक हो तो उनसे भोजन पानी की अवश्य पूंछ लें।

वही हमारे प्रेस फोटोग्राफर जो पल पल की खवर हमलोगों तक पहुंचा रहे है। उनका भी ध्यान रखना हम सभी का कर्तव्य है।

ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

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