Uncategorised
Trending

संसार अवस्था में कोई भी चीज इक्छा ओ से परे नहीं छोटी छोटी वनस्पतियां भी अच्छे बुरे का अनुभव करती हैं-मुनि श्री समता सागर जी महाराज

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर)- इस शरीर को श्रम की आवश्यकता है,आज का आदमी साधनों का इतना अधिक आदी हो गया है कि वह पैदल नहीं चलना चाहता है और इन सभी कारणों से विन वुलाए वीमारियां गिफ्ट में मिल रही है। जब कि शरीर को श्रम की आवशक्ता है आज यदि थोडी़ सी दूर भी चलना है तो व्यक्ति पैदल नहीं चलना चाहता और इन सभी कारणों से ही विन वुलाऐ वीमारी को गिफ्ट में मिल जाती है।

उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने श्री वासूपूज्य जिनालय इनद्र प्रस्तथ कालौनी में प्रातःकालीन प्रवचन सभा में व्यक्त किये। उन्होने कहा कि संसार अवस्था में कोई भी जीव इच्छाओं से परे नहीं, छोटी छोटी वनस्पतियां भी इष्ट अनिष्ट का अनुभव करती है, जब तक इस शरीर में जीवन है वह किसी भी गति में हो उसको अनुभव होता ही है।

मुनि श्री ने कहा कि त्याग के भाव या परिणाम जड़ की क्रिया नहीं है। उन्होंने कहा कि त्याग भी चेतना के ही परिणाम है। मुनि श्री ने कहा कि यदि आपका सोने का उठने का समय निश्चित है तो आपकी पूरी दिनचर्या व्यवस्थित हो जाती हे।उन्होंने कहा कि भले ही कोरोना रोग की वैक्सीन न वनी हो लेकिन हमारे आचार्यों ने हम लोगों के लिये वहूत पहले से ही वैक्सीन तैयार कर दी है।

मुनि श्री ने कहा कि जो व्यक्ति प्रकृति के साथ चलता है, उसके लिये रोग प्रतिरोधक क्षमता वड़ जाती है।उसका सवसे वड़ा उदाहरण यही है कि जिनका जीवन व्यवस्थित एवं पृकृति के साथ जुड़ा है, वह आज कोरोना रोग से मुक्त हें। उन्होंने श्रावकाचार का उल्लेख करते हुये कहा कि आज जो भी मनुष्य श्रावकाचार का पालन कर आदर्श जीवन विता रहा है, और अपनी व्यवस्थित दिन चर्या के साथ अपने आहार में तुलसी और कालीमिर्च सोंठ और दालचीनी तथा गिलोय का प्रयोग कर रहा है तो आपके अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता वड़ती हे।

उन्होने विदिशा उदयगिरि स्थित दयोदय गौ शाला के संद्रभ में कहा कि जब से गौ शाला के काम में युवाओं ने जबाबदारी को सम्हाला है तव से जीव दया के प्रति जागरूकता वड़ गयी है। एवं वह स्थान किसी गोकुल और वृन्दावन से कम नहीं लगता. उन्होंने कहा कि मन की एकाग्रता का नाम ही ध्यान है, मन की एकाग्रता शुभ भाव की होंना चाहिए, मन शुभ में भी जा सकता है, और अशुभ भावों में भी जैसे एक वगुला भी एकाग्रता के साथ मक्षली को निहारता है, वंहा पर उसका उद्देश्य अशुभ है,वह जीवों की हत्या करता है।

उन्होंने कहा कि वर्षाकाल का समय है,वहूत से जीव जो कि उसी कलर के पैदा हो जाते है,तो देख भाल कर चलना चाहिए, जिससे आपके चलने फिरने में किसी जीव की हिंसा न हो।उन्होंने परिवार समाज और राष्ट्र निर्माण की वात करते हुये कहा कि एक विल्डिंग को वनाने में कितना अधिक समय लगता है, लेकिन तोड़ने में कोई समय नही लगता है, उसी प्रकार समाज को जोड़ने का कार्य 1992 से समाज को जोड़ने का जो प्लैटफॉर्म तैयार किया गया था वह आज फलता फूलता नजर आ रहा है।

उन्होंने उस समय की चर्चा करते हुये कहा कि हालांकि उस वात को निकले 28 वर्ष निकल गये लेकिन आज हम जब उन पुराने चहरों को देखते है तो वही घटनाएं सामने आ जाती है।उक्त समय वहूत ही लम्वा प्रवास कुछ संयोगों कारण मिला था।ग्रीष्म काल की तपन निकली और जो पसीना निकल कर वहा तो आप लोगों पर गुरूदेव की कृपा हो गई थी समाज की एकता का प्रभाव पड़ा पुण्य ने जोर मारा और सर्दी- गर्मी और वारिस तीनों मौसम के साथ चातुर्मास का मौका मिला था

इस अवसर पर ऐलक श्री निश्चयसागर जी महाराज ने कहा कि  विदिशा नगर को आचार्य श्री का आशीर्वाद मिला है किसी एक कालौनी को नहीं किसी एक जिनालय को नहीं संपूर्ण विदिशा नगर को मिला है, औरसभी को मिल जुल कर प्रयास करना है।जब आप कोई भी कार्य एकता के साथ करते है तो उस कार्य में अवश्य सफलता मिलती है,

मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विदिशा ने वताया आज मुनि श्री की आहार चर्या   समाज के संरक्षक हृदय मोहन जैन के यंहा एवं ऐलक श्री की आहार चर्या डा. ए. के जैन वैटनरी के यंहा संपन्न हुई। रविवार को जिनवंदना कार्यक्रम के अन्तर्गत श्री पारसनाथ जिनालय रामद्वारा में मुनि श्री के प्रवचन एवं आहार चर्या संपन्न होगी।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

Tags

Related Articles

Back to top button
Close