मकर सक्रांति पर करेंगे दान तो बनेंगे धनवान : संत चंद्रप्रभ

0

- Advertisement -

प्रसिद्ध साधना स्थली संबोधि धाम में सत्संग का हुआ आयोजन

AHINSA KRANTI NEWS / JAIN NEWS
जोधपुर, 13 जनवरी। राष्ट्र-संत श्री चंद्रप्रभ महाराज ने कहा है कि कामयाबी बड़ी नहीं होती, उसे पाने वाले बड़े होते हैं। दरार कभी बड़ी नहीं होती, उसे भरने वाले बड़े होते हैं। रिश्ते कभी बड़े नहीं होते, उसे निभाने वाले बड़े होते हैं। अमीर कभी बड़े नहीं होते, औरों की मदद करने वाले बड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि दान देने से पैसा भले ही कम होता हो पर घर में लक्ष्मी हमेशा बढ़ती है। आगे से हम दस रूपया खर्च करते हैं, वो पीछे से हजार रूपये झोली में डाल देता है। दान न देने वाले और केवल धन को इकट्ठा करने वाले अपनी सम्पति के वॉचमैन होते हैं, वे धन की सुरक्षा कर पाते हैं, पर उपयोग नहीं कर पाते हैं। संत-प्रवर ने प्रेरणा देते हुए कहा कि जब एक गरीब घर में पैदा होने वाला बच्चा किसी एक तपस्वी संत को खीर समर्पित करने के कारण मरकर शालिभद्र सेठ बन सकता है, तो हमें धनवान होने के लिए अपने कदम दान के लिए बढ़ा देने चाहिए।
संत प्रवर मकर सक्रांति पर संबोधि धाम में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।

- Advertisement -


संतप्रवर ने महिलाओं से कहा कि जब भी नई साड़ी खरीदें पहले एक पुरानी साड़ी का दान कर दें। इससे परिग्रह भी नहीं बढ़ेगा, गरीबों की सेवा भी होगी और नई साड़ी भी आ जाएगी। संतप्रवर ने कहा कि अगर कोई गरीब या जरूरतमंद बीमार दिख जाए तो उसे औषधि दान देंं। अगर किन्हीं लोगों या सामाजिक संस्थाओं के पास अतिरिक्त जमीन हो तो वे भूदान करें। अपने जरूरतमंद भाइयों को मकान बनाकर दें। जीते जी एक बार रक्तदान और मरने के बाद नेत्रदान करें। अन्नदान, वस्त्रदान, औषधिदान, ज्ञानदान, भूदान, रक्तदान, नेत्रदान करने से न केवल ईश्वर आप पर सदा मेहरबान रहेगा वरन् आप मानवता के ऋण से भी मुक्त हो जाएँगे।


संतप्रवर ने कहा कि संत के दो धर्म है ज्ञान और ध्यान और गृहस्थ के दो धर्म है दान और पूजा। उन्होंने कहा कि पुण्याई दान देने से बढ़ती है। प्रकृति में हर चीज लौटकर आती है। जो मानवता के नाम दस रुपये लगाता है भगवान उसे हजार गुना करके लौटाता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति जीवन में दान देने की आदत डाले। चाहे थोड़ा ही दो, पर रोज दो। जो करना है अपने हाथों से करके जाना। कल का कोई भरोसा नहीं है और हमारे पीछे हमारे नाम पर दान-पुण्य होगा इस बात पर भी भरोसा मत करना। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी और सरस्वती की कृपा सदा वहाँ बरसती है जहाँ इनका सदूपयोग होता है। इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं कुछ खाकर खुश होते हैं तो कुछ खिलाकर। जो खाकर खुश होते हैं वे सदा औरों पर आश्रित रहते हैं, पर जो खिलाकर खुश होते हैं उनके भंडार प्रभु-कृपा से सदा भरे हुए रहते हैं।
संतप्रवर ने कहा कि मनुष्य का एक ही धर्म है दूसरों की मदद करना। हम दूसरों का भला करने में सदा आगे रहें। किसी नेत्रहीन को चौराहा पार करवाना हो, किसी घायल को हॉस्पिटल पहुँचाना हो, अपंग को बैठने के लिए जगह देनी हो, किसी बुजुर्ग को उनके घर पहुँचाना हो, बिछुड़े हुए बच्चे को माँ-बाप से मिलवाना हो, गरीब को दवाई दिलवानी हो तो हम संकल्प लें कि पीठ दिखाने की बजाय उनकी सहायता करेंगे। ऐसा करके आपको न केवल इंसान की सेवा का वरन् ईश्वर की पूजा का भी लाभ मिल जाएगा।
इस अवसर पर नगर निगम गौशाला में गौ सेवा हेतु सब्जी की गाड़ी भिजवाई गई और जरूरतमंद भाई बहनों को सहयोग समर्पित किया गया।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.