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सम्यक् दृष्टी जीव यदि धर्म पुरुषार्थ करेगा तो आठवे स्वर्ग तक जा सकता है -मुनि श्री समता सागर जी महाराज


अहिंसा क्रांति /देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर)-भले ही पुरुषों को पूरे अधिकार मिले हों लेकिन घर की सभी व्यवस्थाऐं तो गृहमंत्री के हाथ में ही होती है, इसलिये गृहमंत्री की शक्ती को आप लोग कम मत आंकना उपरोक्त उदगार मुनिश्री  समतासागर जी महाराज ने शीतलधाम विदिशा में जैन तत्ववोध की ओन लाईन कक्षा को सम्वोधित करते हुये समवसरण में तीर्थकंरों के १० अतिशय की चर्चा करते हुये कहे।

उन्होंने कहा कि पंचकल्याणक आदि प्रतिष्ठाओं में आप सभी लोग देखते है कि जब तीर्थंकर वालक का जन्म होता है तो तीर्थंकर वालक को प्रसुति गृह से तो शची इन्द्राणी ही लेकर आती है। भले ही सौधर्म इन्द्र १६ स्वर्ग का मालिक है, लेकिन यंहा पर उसे शचि इन्द्राणी के सामने झुकना ही पड़ता है, और मिन्नतें करना पड़ती है, तव कंही जाकर वह उस तीर्थंकर वालक को नव्हन करने पांडुक शिला पर ले जाता है।

मुनि श्री ने कहा कि भले ही सौधर्म इन्द़ के पास वज़वृषभ नाराच संजुलन होता है, एवं वह शक्तिओं का मालिक है लेकिन उससे पहले उसकी इन्द्राणी अपनी आयू को पूर्ण करके इधर पृथ्वी पर आकर मुनि वनकर तपस्या कर पहले मोक्ष चली जाती है।

उन्होंने कहा कि वज़वृषभ नाराच संजुलन हर जीव के पास नहीं होता और पंचम काल में तो यह किसी के भी पास नही है, उनकी हड्डियॉ और सहन शक्तियां इतनी मजवूत होती है, वह यदि दूसरों पर प्रहार करें तो सीधे पहाड़ों को भी तोड़ देते है, एवं उनका सहनन भी इतना अधिक होता है, कि वह भारी से भारी प्रहार को भी सहन कर लेते है, ऐसे वज़ वृषभ नाराच संजुलन में यदि व्यक्ति मोक्ष जाने का पुरुषार्थ करे तो वह मुक्ती पद को प्राप्त कर सकता है।

मुनि श्री ने कहा कि  सम्यक् दृष्टी जीव यदि धर्म पुरुषार्थ करेगा तो आठवे स्वर्ग तक जा सकता है, लेकिन यदि वह उस शक्ती का दुरुपयोग करेगा तो वह तीसरे नरक तक भी जा सकता है। उन्होंने श्रावक के १२ वृतों की चर्चा करते हुये कहा कि यदि व्यक्ती घर पर ही है, और उसके परिणामों  में विशुद्धि है तो वह भी सोलहवे स्वर्ग तक भी पंहुच जाते है।

इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि वर्तमान समय कोरोना काल है, और सभी लोगों को धर्म लाभ सीधे मंदिर आकर के नहीं मिल पा रहा है, तो वह अपनी भावनाएं व्यक्त कर यंहा पर शांतिधारा करवा सकते है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार शुभ भावों से शुभ परिणाम वनते है और उन शुभ परिणामों की वर्गणाओं का प्रभाव निश्चित करके उनके परिवारी जनों पर पड़ता है।

शीतलधाम में वर्तमान में भगवान श्री शीतलनाथ स्वामी की चार कल्याणक गर्भ जन्म तप और ज्ञान कल्याणक भूमी है, यंहा पर विशाल समवसरण आचार्य गुरूदेव श्री विद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद से वनने जा रहा है, ऐसे में आपका धन यदि यंहा पर लगता है, तो वह आपके धर्म वृद्धि का मार्ग प्रसस्त करेगा। उन्होंने विदिशा नगर एवं ओन लाईन सुनने वाले सभी श्रोताओं को आशीर्वाद दिया।

उपरोक्त जानकारी देते हुये प्रवक्ता अविनाश जैन वताया प्रतिदिन अतिशय युक्त भगवान श्री आदिनाथ स्वामी वर्रो वाले वावा की प्रतिमा का अभिषेक और शांतिधारा प्रतिदिन मुनि श्री समतासागर जी महाराज के मुखारविंद से चल रही है। आज चतुर्दशी का पर्व था एवं शशी जैन की प्रेरणा से अविनाश जैन, मनभावन परिवार एवं डा. चंद्र मोहन पाटनी के स्वास्थ्य लाभ हेतू निरंजन सेठी ने प्रतिनिधि वनकर शांतिधारा समर्पित की।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

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