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मन की इच्छाओं को वश में होने पर मनुष्य सूखी बन सकता है सुकनमुनि

AHINSA KRANTI NEWS

7 जुलाई अहिंसा भवन   दुसरों को बदल ने से पहलें स्वंय को बदलों  सुखी  हो जाओगे  अहिंसा भवन में मंगलवार  आयोजित धर्मचर्चा करते हुये प्रवर्तक सुकनमुनि ने  बड़े ही सहज शब्दों कहां कि आज हर वक्ति मे सूख की तलाश मे भटक रहा है जबकि दुखी होने का कारण भी स्वंय ही है जीवन मे सुखी होना चाहते हो  स्वंय के तरिके को  बदले  !

धर्म के मार्ग से ही सूखी बना जा सकता है इच्छाओं का कभी भी अंत नहीं होता है व्यक्ति मन की इच्छाओं को वश  मे करले तो सूखी बन सकता है! ईस दौरान डॉ वरूण मुनि ने सुख विपाक सूत्र का वाचन करते हुयें  फरमाया की महापुरुषो मे   महावीर ,  राम, भगवान कृष्ण  ने जितने दुख देखे उन्ह  दुखोः मेसे   हमारे दुख  बहुत ही छोटे है अगर सुखी बनना है हमे हमारी सोच को बदले तभी  इंसान  सूखी हो सकता है वो. संतसंग  द्वारा ही संभव हो सकता है  अहिंसा भवन के संरक्षण हेमन्त आंचलिया ने बताया की प्रतिदिन 9 बजें से 10 बजे  तक प्रवर्तक सुकनमुनि आदि संतो की धर्मचर्चा रहेगी तथा  शायकाल 7 : 30 से प्रतिक्रमण  औरप्रातः 6 बजें प्रार्थना और  10  जुलाई शुक्रवार से तेले तप की लड़ी आरंभ होगी ! 

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