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सनावद में वीर शासन जयंती मनाई गई

AHINSA KRANTI NEWS / SANMATI JAIN KAKA



सनावद:आज वीर महा-अति वीर भगवान महावीर स्वामी का वीर शासन जयंती पर्व है। यह वीरों का पर्व है, इस जगत में पूजनीय वही हुए जो वीर हैं और जो पूजनीय हैं उनका ही शासन होना चाहिए।आचार्य डॉ. प्रणाम सागर जी महाराज ने कहा कि महावीर स्वामी ने इस जगत को संस्कार और सम्मान के शब्दों से अलंकृत किया है। महावीर स्वामी की दिव्य वाणी ही है जिसकी बदौलत संस्कारों को सम्मान और पूजनीय स्थान मिलता है।

आज के शुभ दिवस मे श्री वीर प्रभु की दिव्य देशना 66दिनो के अंतराल के बाद विपुलाचल पर्वत पर समोशरण के मध्य खिरी थी ।दीक्षा लेने के बाद महावीर जी ने मौन व्रत अंगीकार किया ।बारह वर्ष की तपस्या के बाद ऋजुकूला नदी के तट पर शुक्ल ध्यान पूर्वक केवलज्ञान प्राप्त किया ।उसी समय इंद्र की आज्ञा से कुबेर ने समवशरण की रचना की लेकिन प्रभू की वाणी नही खीरी ।ऐसे 66 दिन हो गये ।


सन्मति जैन ने बताया की वर्धमान की नगरी कहे जाने वाले सनावद मेंआचार्य श्री ने वीर शासन जयंती के पावन अवशर पर वीरसाशन जयती की महत्ता बताते हुवे कहा की
इंद्र ने अवधि ज्ञान से यह जाना कि यहां गणधर का अभाव है ।गणधर होने की योग्यता इंद्रभूति गौतम मे है ऐसा जानकर युक्ति पूर्वक श्लोक का अर्थ पूछा । इंद्रभूति गौतम ने श्लोक का अर्थ तो उस समय नहीं बताया लेकिन महावीर प्रभु के समवशरण मे अपने 500 शिष्यों सहित पधार गये और वहां समवशरण की अद्भुत रचना एवं मानस्तंभ को देखते ही उनका मान गलित हो गया उसी समय आपने जैनेश्वरी दीक्षा धारण की अनेक प्रकार से महावीर स्वामी की स्तुति की ।
उन्हे गणधर पद की प्राप्ति हुई और वे प्रथम गणधर कहलाये उसी समय 18 महाभाषा और 700 लघुभाषा सहित दिव्य ध्वनि खिरने लगी गणधर गौतम स्वामी ने अंतर्मुहूर्त मे द्वादशांग रूप जिनवाणी की रचना कर दी ।


ऐसी महा कल्याण कारी जिनवाणी आज हमारे पास है जिससे हमारा और सभी जगत के जीवों का कल्याण हो रहा है। साथ आचार्य श्री सनवाद में चातुर्मास की घोषणा कभी की जिसकी कलश स्थापना 9 जुलाई को की जायेगी। इस अवशर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।

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