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थामला में चातुर्मास हेतु विराजित दो संतो का हुआ केश लोच 

AHINSA KRANTI NEWS

थामला।  वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ थामला, मैं वर्षावास कर रहे परम पूज्य गुरुदेव श्री रितेश मुनि जी महाराज साहब पूज्य श्री प्रभात मुनि जी महाराज साहब का बुधवार को  दोनों संतों का हुआ केश लोच हुआ। पूज्य रितेश मुनि ने फरमाया कि चतुर्मास काल में संवत्सरी से पहले पहले जैन साधु और साध्वी अपना केश लोच करते हैं। जैन धर्म के अंदर जितने भी तीर्थंकर हुए हैं भगवान हुए हैं पहले ऋषभदेव भगवान से लेकर 24, वे तीर्थंकर प्रभु श्री महावीर स्वामी तक सभी तीर्थंकर भगवान पंचमुस्ठी केश लोच करते हैं। यह परंपरा तीर्थंकरों भगवान द्वारा प्रारंभ है। आज भी जैन साधु साध्वी आ इस परंपरा की गरिमा बनाए रखे हुए हैं। निर्जरा के 12 भेद में बतलाते हुए कहा कि काय क्लेश तप भी केश लोच के अंतर्गत ही आता है। जैन मुनि केस लोच के समय संमभाव धर्म की आराधना करते हैं। जैसे एक माली अपने बगीचे से घास को उखाड़ कर प्रसन्न होता है। ऐसे ही जैन साधु साध्वी अपने सीर और दाढ़ी मूंछ के बालों की लोच होने पर बड़े प्रसन्न होते हैं। अपार अशुभ कर्मों की निर्जरा हो जाती है। पूज्य प्रभात मुनि ने कहा की मनुष्य का जीवन अनेक समस्याओं से भरा हुआ है जीवन पूरा हो जाता है पर समस्याएं कभी खत्म नहीं होती। हर समस्या का एक समाधान होता है वह समाधान क्या है यह हम सभी चिंतन करें चिंता को छोड़कर। तभी आनंद की प्राप्ति होगी।श्री संघ थामला श्रीसंघ ने संतो के केस लोच की सुख साता पूछी। मंत्री मोहन लाल सोनी केश लोचन के साक्षी बने। पूनमचंद वडालमिया, मंत्री रतन प्रकाश सोनी  आदि जैन श्रावक समाज।

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