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गुरु पूर्णिमा गुरुओं के प्रति समर्पित एक आदर्श पर्व है : देवेंद्रसागरसूरि

AHINSA KRANTI NEWS

राजाजीनगर जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने गुरुपूर्णिमा पर्व के ऊपर प्रकाश डालते हुए कहा की गुरु-शिष्य का रिश्ता दुनिया का सबसे सच्चा और पवित्र रिश्ता है, जिसमें एक सच्चा गुरु निस्वार्थ भाव से अपने शिष्य के जीवन को सफल बनाने के लिए मेहनत करता है और अपने शिष्य के अंदर सभी अच्छे गुणों का विकास करता है।


और एक सच्चा शिष्य अपनी पूरी श्रद्धा और लगन के साथ अपने गुरुओं के बताए गए मार्ग पर चलता और उनके उपदेशों का अनुसरण करता है। इसलिए गुरु-शिष्य के रिश्ते का महत्व अनादिकाल से चला रहा है। आचार्य श्री आगे बोले कि आज के भागदौड़ भरे भौतिकतावादी समाज में हमे गुरु ही जरूरत बहुत अधिक है। गुरु का महत्व सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में ही नही, बल्कि व्यापक अर्थ में देखने को मिलता है। अब तो आध्यात्मिक शांति के लिए अनेक लोग किसी न किसी गुरु की शरण में चले जाते है। घर, मकान, धन, सम्पत्ति और भौतिक साधन जुटाने में आज का व्यक्ति अंधा हो गया है।

यही वजह है की भारत में आत्महत्या के मामले हर दिन देखने को मिल रहे है। लोगों की जिन्दगी में तनाव भर गया है। छोटी छोटी बातों पर लोग एक दूसरे को जान से मारने को तैयार हो जाते है, लोगों के जीवन में आध्यात्मिक शांति नही है।निष्कर्ष: हमारे समाज में हर दिन अनेक प्रकार के अपराध हो रहे है। इसका क्या कारण है?? इसकी वजह है की लोग कहीं न कहीं अपने जीवन में भटक गये है। उनके पास मानसिक शांति नही रह गयी है। लोग अपना दिमागी संतुलन खो रहे है। तनाव, अवसाद में जीवन जीने की वजह से वो अपराध कर बैठते है इसलिए हर भटके हुए व्यक्ति को सही मार्ग दिखाने का काम गुरु की करता है।

आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरुओं के प्रति समर्पित एक आदर्श पर्व है।गुरु पूर्णिमा जैसे पर्वों के माध्यम से जहां अपने गुरुओं के प्रति सम्मान का भाव प्रकट कर अपने गुरु से अपने रि्श्ते को और अधिक मजबूत करने का मौका मिलता है, वहीं दूसरी तरफ आजकल गुरु-शिष्य का रिश्ता भी कलंकित हो रहा है।कई ऐसी अपराधिक घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे इस रिश्ते की महत्वता कम होती जा रही है, वहीं लोग कहीं न कहीं अपने जीवन में भटक गए हैं, जिन्हें फिर से एक मार्ग पर लाने की जरूरत है और इस रिश्ते की महत्वता को समझने की जरूरत है। 

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