मुनि संघ का भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह शीतलधाम में सम्पन

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अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन


विदिशा – सोचा न था कि गुरूदेव की रहमत इस कदर वरसेगी कि सारी दुनिया शीतलधाम आने को तरसेगी” उपरोक्त उदगार मुनि श्री सौम्यसागर जी महाराज ने सोमवार को शीतलधाम में पिच्छिका परिवर्तन समारोह को संवोधित करते हुये कहे मुनि श्री ने कहा कि पूज्य गुरुदेव का आशीर्वाद और मुनि श्री विनम्रसागर निस्वार्थ सागर आदि सभी मुनिराजों का समर्थन और संयोग था कि में अपने आपको गुरुदेव की इस कृति शीतलधाम के लिये कुछ करने योग्य वना पाया उन्होंने बड़े ही विनीत और करूणा भाव से कहा कि गुरूदेव का आशीर्वाद तो वंहा से आता था लेकिन ये नौ मुनिराज मेरे शरीर के अंग वन जाया करते थे, जिससे में बाहर से आने बाले श्रैष्टिओं को समय दे पाया और में संतुष्ट हूं कि आचार्य गुरूदेव की कृपा से निश्चित समय सीमा में शीतलधाम का वह भव्य ऐतिहासिक पाषाण से निर्मित तीन मंजिला समवसरण तैयार हो जाऐगा।और अगला वर्ष हम सभी दस मुनिराज पूज्य गुरुदेव के साथ पंचकल्याणक होंगे।
उन्होंने कहा कि एक साल में कार्य को पूर्ण करने का संकल्प जिस ठेकेदार ने लिया है,वह 26 साल का नौजवान ने मुनिसंघ को विश्वास दिलाया है, भले ही दो माह का समय निकल गया हो लेकिन आने बाले दस माह में आप देखेंगे कि समवसरण आपको आकार लेता नजर आऐगा। उन्होंने कहा कि गुरूजी के सानिध्य में मेरे दो चातुर्मास हुये एक उनके चरण सानिध्य में हुआ था वंही दूसरा उनके स्मरण के सानिध्य में संपन्न हुआ। मुनि श्री ने सभी मुनिराजों की तारीफ करते हुये कहा कि दशलक्षण धर्म देखना है तो इन सभी नो मुनिराजों में देखलो… सभी मुनिराजों में शुचिता और पवित्रता का भाव जुड़ा हुआ है। मुनि श्री ने कहा कि जिनको पिच्छिका प्राप्त हो गयी है,इस पिच्छिका में उसमें गुरूदेव का भी आशीर्वाद है,पिच्छिका यदि किसी के द्वारा प्रदान न की होती तो आज आपके हाथ में कैसे पहुंचती उन्होंने जो जीवन शैली सिखाई है उससे कई वच्चों का मार्ग भटकने से वच गया।इस अवसर पर मुनि श्री विनम्रसागर जी महाराज ने पिच्छिका परिवर्तन समारोह का संचालन करते हुये पिच्छी जब साधू के हाथ में आती है,तो वह इस पिच्छिका से साल भर तक अपने पास रखकर अपने आपको हिंसा से वचाते है एवं जीवों की रक्षा करते है, वही पिच्छी जब किसी गृहस्थ के हाथों में पहुंचती है तो वह गृहस्थ भी अपने पुराने जीवन को भूल सदगृहस्थ वनकर जीवन जीने की प्रेरणा लेता है। मुनि श्री ने कहा कि प्रश्न उठ सकता है कि जल, स्थल, आकाश, जीवों से भरा हुआ है, फिर जैन साधू कैसै जीवों की रक्षा कर सकते है? उन्होंने कहा कि जो सूक्ष्म जीव होते है उनकी तो हम रक्षा नहीं कर सकते लेकिनजो प्रायः जो वादर जीव होते है उन जीवो की रक्षा हमारे निमित्त से हो जाती है। उन्होंने मयूरपंख की त्याग की महिमा को बताते हुये कहा कि मोर का सौन्दर्य उसके पंख हुआ करते है,और वह उन पंखों को स्वतः त्याग करता है यदि न करे तो उसको तकलीफ वड़ जाती है,ऐसे पंख को जंगल से एकत्रित कर उनको डोरी से वांधकर पिच्छिका तैयार की जाती है,जो स्पर्श में वहूत ही कौमल एवं भार में लघु होती है जिसे प्रत्येक मुनि 24 घंटे अपने पास रखकर के अपनी चर्या का पालन करता है। उन्होंने कहा कि यह पिच्छिका जिसके हाथों से जिस गहस्थ के हाथो में जा रही है,वह सदगृहस्थ ने भी सबसे पहले त्याग की ही भावना भाई है, उन्होंने कहा कि दुनिया में त्याग की कोई बोली नहीं हुआ करती है,वंहा तो आपके संयम की ही परिक्षा होती है। इस अवसर पर मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी महाराज ने भी संवोधन दिया।प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया इस अवसर पर मुम्बई,रहली, वैरसिया भोपाल मुंगावली,पटनागंज,अशोक नगर, गंजवासौदा तथा राजस्थान, गुजरात आदि प्रदेशों से भक्तगण पधारे थे।23 नवम्वर को मुनिसंघ का प्रातःकालीन प्रवचन दि. जैन बड़ा मंदिर में होगा तथा आहार चर्या भी उधर ही से संपन्न होगी। दौपहर एक वजे मुनिसंघ आचार्य गुरूदेव विद्यासागर गौ संवर्धन केन्द्र उदयगिरि की ओर प्रस्थान करेंगे,कार्यक्रम का संचालन अनूप भैया ने किया दीप्रज्जवलन एवं मंगलाचरण के उपरांत पिच्छिका परिवर्तन समारोह का संचालन मुनि श्री विनम्रसागर जी महाराज ने किया एवं मुनिसंघ की पुरानी पिच्छिका सुधी श्रावकों जिन्होंने मुनिसंघ से वृत एवंसंयम गृहण किये उन सभी गृहस्थों को प्राप्त हुई। मुनि श्री सौम्यसागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका सचिन एवं रिमझिम जैन बी.एस किरीमौहल्ला विदिशा को मिली वंही मुनि श्री विनम्रसागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका दीपक जैन सपना जैन विदिशा मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका संजीव जैन एवं मौनिका जैनचौधरी, मुनि श्री निस्पृह सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका दीपक स्वाती जैन आर.टी.ओ मुनि श्री निश्चल सागर जी महाराज की पिच्छिका सुभम स्वाती जैन खातेगांव, मुनि श्री निर्भीक सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका शैलेष सीमा जैन रहली, मुनि श्री निराग सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका राजेन्द्र समता जैन पथरिया, मुनि श्री निर्मद सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका राजीव प्रीती जैन भैया साहित्य सदन विदिशा, मुनि श्री निसर्ग सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका अमित स्तुती जैन वैरसिया तथा मुनि श्री ओम कार सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छिका मनीष पूजा जैन मनुहार विदिशा को प्राप्त हुई।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा,मध्यप्रदेश
संपर्क – 7828782835/8989696947

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