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मैसूर में कुंथुनाथ जैन मंदिर के शिखर पर चढ़ाई ध्वजा

AHINSA KRANTI NEWS

मैसूर। मैसूरु मे सुमतिनाथ जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ के तत्वावधान में तथा आचार्य अजीतशेखर सूरी तथा आचार्य नयचंद्र सागर सुरीश्वर व साध्वी वृंद के सान्निध्य में ईट्टीगेगुड मे मानसरा मार्ग पर स्थित कुंथूनाथ जैन मंदिर के शिखर पर 23 ध्वजा लाभार्थी मेनाबाई भंवरलाल राँकासेठ परिवार जैतारण वालो की ओर से चढाई गई l कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार की रोकथाम हेतु शहर लॉक डाउन किया गया है l शहर पुलिस उपायुक्त ए.एन.प्रकाश गौड़ा तथा  नजरबाद पुलिस थाना निरीक्षक श्रीकांत के निर्देशानुसार सामाजिक दूरी बनाते हुए भक्तो की समित संख्या रख धार्मिक आयोजन संपन्न किया गया l

इससे पूर्व दोनों गुरु नितेश गुरु व रुपेश गुरु की ओर से स्नात्र पूजा पढ़ाते हुए पुण्याम पुण्याम प्रियंतम प्रियंतम के जयकारो के साथ ध्वजा चढ़ाई गई l जैन शासन स्थापना दिवस पर सुमतिनाथ संघ द्वारा ध्वज फ़हरा कर वंदना किया गया l लाभार्थी परिवार की ओर से कुंथूनाथ भगवान का पक्षाल, पूजा, मंगलारती, दीपक व शान्ति कलश विधिवत रूप से किया गया l सुमतिनाथ जैन संघ के अध्यक्ष अशोक दाँतेवाड़ीया की ओर से कोरोना वायरस के खात्मे के लिए व विश्व शांति के लिए भक्तो को ज्यादा से ज्यादा सामायिक व नवकार मंत्र जाप करने के लिए कहा l

इस अवसर पर सुमतिनाथ जैन संघ के ट्रस्टी हंसराज पगारिया, नगराज राठोड़ ,सुमतिनाथ नवयुवक मंडल अध्यक्ष प्रवीण लुंकड़,पार्श्व पद्मावती ट्रस्ट के अध्यक्ष दलीचंद श्रीश्रीमाल,सदस्य महावीर भंसाली, जगदीश जैन, अशोक सिंघवी, अशोक, रमेश, प्रसन्न,दिनेश, प्रितेश, राहुल, सागर, मनीष राँका आदि मौजूद रहे l हंसराज पागरिया ने बताया कि लॉक डाउन को देखते हुए ध्वजा महोत्सव का आयोजन सामान्य रूप से करके एक परंपरा निभाई गयी, क्योंकि कोरोना को देखते हर सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखना आवश्यक है, ताकि किसी तरह का कोई संक्रमण ना फैले, इसी को देखते हुए जो मुख्य रूप से जो ध्वजा के लाभार्थी एवं पदाधिकारीगण ही उपस्थित थे, गुरु भगवन्तो से आज्ञा लेकर ध्वजा चढ़ाई गयी। दलीचंद श्रीश्रीमाल ने बताया कि ध्वजा के दौरान लोगो को घरों में ही रहकर सामायिक, जाप करने का आग्रह किया, लोगो ने घरों में रहकर जाप एवं सामायिक कर जैन शासन स्थापना दिवस मनाया । मंडल के अध्यक्ष प्रवीण लुंकड़ ने कहा कि इस महामारी में सभी मंदिरों के दरवाजे बंद हो गए लेकिन हमारी अंतर आत्मा के दरवाजे खुल गयी, आज भले ही मंदिर बंद हो लेकिन प्रभु की प्रार्थना हम घरों में रहकर अपने मन से कर रहे है एवं उसी मन की आँखों से प्रभु परमात्मा के दर्शन भी कर रहे है, हम जो परिवार से दूर हो गए थे महामारी हमे परिवार के साथ रहना सिखाया है । 

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