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“व्रत उपवास एक अद्भुत साधना”_आचार्य प्रणाम सागर


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बैडिया (नि प्र) उपवास आत्मा के करीब पहुंचने की अद्भुत कला है। उपवास मन को एकाग्रचित्त करके परमात्मा के पास बैठने की प्रक्रिया हैं, उपवास देह को अपरिग्रह रखने की उपासना है,उपवास को जेनागम में तप कहा है। नगर में विराजित परम पूज्य गुरुवर आचार्य श्री108 डॉ प्रणाम सागर जी महाराज ने न्यूज चैनल के माध्यम से बताया कि बारह तपो में अनशन का नाम एक बाह्य तप है।

इसके अन्तर्गत श्रावक और साधु अन्न जल का पूर्ण त्याग करके अंतरात्मा में अपना मन लगाता है।  दूध तपता है तो वह घी बन जाता हैं, पानी तपता है तो वाष्प बनकर आकाश में छा जाता है, इसी तरह जो उपवास करता है वह तन से तपस्वी होकर आत्मा को तेजस्वी बना देता हैं।  समाज अध्यक्ष अजय शाह एवं सावन जैन ने बताया की आज की आहार चर्या श्री  लोकेंद्र कुमार शाह के यहां सम्पन्न हुई और शांति धारा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । 

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