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धर्म ग्रन्थों को पड़कर अपने जीवन को वदलने का अधिकार सभी को है – मुनि श्री समता सागर जी महाराज

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन
विदिशा(भद्दलपुर) – धर्म का विज्ञान प्राचीनता को मानता है, जवकि आधुनिक विज्ञान लेटेस्ट को मानता है, उपरोक्त उदगार मुनि श्री समता सागर जी महाराज ने प्रातःकालीन जैन तत्व वोध की कक्षा में युवकों को सम्वोधित करते हुये कहे।
आज का वैज्ञानिक पुराने वैज्ञानिकों की रिसर्च को गलत सावित कर सकता है किन्तु धर्म के क्षेत्र में प्राचीन धर्म ग्रन्थों के सिद्धांतों को गलत सावित नहीं कर सकता यही कारण है कि धर्म के सिद्धांत स्थाई और शास्वत हे, जवकि वैज्ञानिक दुनिया अपनी खोजों को वदलती रहती है।
मुनि श्री ने आगे कहा कि धर्म ग्रन्थों को वदलने का किसी को भी अधिकार नहीं है, जवकि  धर्म ग्रन्थों को पड़कर अपने जीवन को वदलने का अधिकार सभी को है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जो भी अपने समय का सदुपयोग करेगा वह अपने जीवन का तो उद्धार करेगा ही  साथ ही पृकृतिकृत वीमारी से भी वच जाऐगा।
इस अवसर पर ऐलक श्री निश्चयसागर जी महाराज ने कुंद “कुंद के कुंदन” जो कि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का पद्धानुवाद है, उसकी वांचना करते हुये कहा कि जो अधिकार संयम लेंने के मनुष्यों को है, धह अधिकार तो स्वर्ग के देवताओं को भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि आप लोगों ने पंचकल्याणक के अवसर पर देखा होगा कि किस प्रकार मनुष्यों और देवताओं मे भगवान की पालकी उठाने को लेकर विवाद होता है, लेकिन संयम लेने वाले मनुष्यों की जीत होती है। चतुर्गति जीवों में सम्यग्दर्शन प्राप्त करने की योग्यता रहती है, उन्होंने उदाहरण देते हुये कहा कि तीर्थंकर महावीर भगवान ने सिंह की पूर्व पर्याय में दो मुनिराजों से सम्यक दर्शन प्राप्त कियाथा।
~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश
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