जैन समाचार

डॉ. आचार्यश्री प्रणाम सागर जी महाराज ने केशलोंच किये

AHINSA KRANTI / SANMATI JAIN KAKA
सनावद:- सनावद के श्री दिगम्बर जैन पार्श्वनाथ बड़ा जैन मंदिर में चातुर्मासरत डॉ. आचार्य श्री 108 प्रणाम सागर जी महाराज ने चौदस के दिन प्रातःकालीन बेला में केशलोंच किये।
सन्मति जैन काका ने बताया की केशलोंच करना जैन मुनियों की उत्कृष्ट और कठिन साधना है। दिगम्बर साधु केशलोंच करते समय ये भाव रखते हैं कि कर्मों की निर्जरा हो रही है और पाप कर्म निकल रहे हैं जिससे दर्द का अनुभव भी नहीं होता। केशलोंच करने के पीछे एक कारण यह भी है कि जैन साधु किसी पर अवलंबित नहीं रहते हैं, वह स्वावलंबी होते हैं इससे हिंसा भी नहीं होती।
दिगम्बर मुनि एक केशलोंच के बाद दूसरी बार केशलोंच कम से कम दो माह और अधिक से अधिक चार माह में करते हैं। केशलोंच के दिन वे उपवास रखते हैं। इस अवशर पर सभी सामज्जन उपस्थित थे।
श्रीमान जी से निवेदन है की समाचार को अपने लोकप्रिय पेपर में उचित स्थान देवे।

आचार्य श्री अपने हाथों से केशलोंच करते हुवे।

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