दीपावली का त्योहार प्राणिओं का संहार करके न मनाऐं – मुनि श्री सौम्य सागर जी

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अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा – जिस प्रकार से अंग्रेजों ने जलियाँवाला बाग नरसंहारकांड कर मानवीयता को छार छार किया था उसी प्रकार आप लोग दीपावली के इस अहिंसक पवित्र त्योहार को फटाके चलाकर क्यों प्राणी संहार करना चाहते हो? उपरोक्त उदगार मुनि श्री सौम्य सागर जी महाराज ने शीतलधाम विदिशा में भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव की पूर्व वेला पर प्रातःकालीन प्रवचन सभा में व्यक्त किये। उन्होंने जलियाँवाला बाग की क्रूरता स्मरण करते हुये कहा कि जिस प्रकार से अंग्रेजों ने नर संहार किया था उन दृश्यों का स्मरण करते है तो रूह कांप जाती है,जैसे अंग्रेजों ने बाड़ा वनाकर चारों ओर से सभी इंसानों को वंधक वनाकर वम के गोले दागे थे,और सभी लोग अपने प्राण वचाते हुये इधर उधर भाग रहे थे लेकिन प्राणों को नहीं वचा पाऐ थे, उसी प्रकार क्या फटाके चलाकर उन सभी छोटे छोटे जीव तथा पशु पक्षियों और प्राणिओं के लिये जलियाँवाला वाग नहीं वनाते? मुनि श्री ने कहा कि जब आप लोग फटाके चलाते है, तो बारुद की दुर्गंध और तेज आबाज से वह प्राणी इधर उधर भागते है, लेकिन उनको जब कोई सहारा नहीं मिलता और वह अकाल मरण को प्राप्त होते है।उन्होंने संकल्प दिलाते हुये कहा कि हम थोड़े से मनोरंजन और उसकी आबाज को अपने कानों के विषय वनाने के लिये उन निरीह प्राणिओं और पशु पक्षियों के लिये अंतिम संस्कार की व्यवस्था को यदि नहीं करेंगे तो आपका और हम सभी का भगवान महावीर का निर्वाण महोत्सव मनाना सार्थक हो जायेगा। दीपावली का त्योहार भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिये है, जीवों हिंसा के लिये नहीं। उन्होंने कहा कि आप उन घरों में रोशनी फैलाइये जिन घरों में रोशनी नहीं होती, मिठाईयां नहीं वनती जो परिवार अभावों में जी रहे है,उन परिवारों को यदि आपने रोशन कर दिया तो आपका दीपावली मनाना सार्थक हो जाऐगा। इस अवसर पर मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने सम्वोधित करते हुये कहा कि आपकी अग्रिम गति आपकी संगति पर डिपेन्ड करती है, जैसे दूध के पास में यदि दही रखा हो तो उसकी दुर्गंध से ही वह ताजी दूध फट जाता है उसी प्रकार अधिक गुणवान व्यक्ती यदि कम गुणवान बाले व्यक्ती से मित्रता करता है तो गुणहीन व्यक्ती अधिक गुणवान को प्रभावित कर लेता है। उन्होंने कहा कि आजकल मांसाहारियों के साथ यदि आप मित्रता रखते है,और उनके साथ पार्टियों में चले जाते है,तो उनके संसर्ग में आकर आपका भी व्यक्तित्व नष्ट हो जाता है।नीच संगति से नीच गति का ही वंध होता है,और उसी कारण से सोम चकृवति को नरक जाना पड़ा। और संगति के प्रभाव से चारुकीर्ती अपने व्यक्तित्व को वचा लेते है और आगे चलकर मोक्ष सुख को प्राप्त करते है।उपरोक्त जानकारी श्री सकल दि. जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन ने देते हुये बताया कि चतुर्दशी के दिन मुनिसंघ ने उपवास के साथ जो संकल्प चातुर्मास के पूर्व लिये थे उन संकल्पों को पूर्ण करते हुये चातुर्मास का निष्ठापन किया।प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया भगवान महावीर का निर्वाण महोत्सव प्रातःकालीन वेला में ४ नवम्वर को अरहंत विहार में मनाया जाऐगा।इस अवसर पर भगवान महावीर की पूजन के साथ निर्वाण लाड़ू चड़ाया जाऐगा। एवं सांयकालीन वेला  में गौतम गणधर स्वामी के कैवल्यज्ञान की गौ धुली वेला में पूजन होगी।५ नवम्वर को प्रातःकालीन धर्मसभा एवं आहार चर्या अरिहंत विहार में ही संपन्न होगी। तथा६ एवं७ सितंबर को शीतलधाम में चातुर्मास कलश वितरण का कार्यक्रम रखा गया है।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा,मध्यप्रदेश
संपर्क – 7828782835/8989696947

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