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दिगम्बर जैन समाज बोंगाईगांव के द्वारा विश्वशांति व स्वास्थ्य एवं समृद्धि की कामना की गई

दिगम्बर जैन समाज बोंगाईगांव के द्वारा अखंड णमोकार मंत्र का जाप कर विश्व को कोरोना संकट से छुटकारा, विश्वशांति व स्वास्थ्य एवं समृद्धि की कामना की गई

जो सम्पूर्ण जिनशासन का सार, चौदह पूर्वों का भी निचोड है, ऐसा णमोकार मंत्र जिसके हदय में सदा रहता है, यह संसार उसका क्या बिगाड सकता है?

AHINSA KRANTI NEWS / रोहित कुमार छाबड़ा


बोंगाईगांव।। कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन के कारण अप्रेल मे जहा भगवान महावीर का 2619वां जन्म कल्याणक महोत्सव घरों में ही मनाया गया था व इसकी पूर्व संध्या पर रात को भारत वर्ष में दीप समस्त समाज के परिवारों द्वारा जलाएं गए।।वहीं कोरोना संकट के चलते व विश्व शांति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की कामना के साथ बोंगाईगांव नगर में दिगम्बर जैन समाज द्वारा अखंड ज्योति जलाकर अखंड नवकार मंत्र का जाप अनुष्ठान किया गया।समाज के अध्यक्ष विजय रारा कार्यकारी अध्यक्ष मनोज सरावगी सचिव कमल पहाड़िया ने बताया कि बोंगाईगांव दिगम्बर जैन समाज द्वारा 12 घंटे का अखंड णमोकार मंत्र शुक्रवार सुबह 08 बजे से प्रारंभ हुआ ओर रात्रि 08 बजे तक किया गया, तथा महामंत्र का संकल्प पूरा होने के पशचात् महाआरती पूरे समाज द्वारा अपने अपने घरों में एक साथ की गई।

इस12 घंटे के अखंड णमोकार मंत्र का जाप बोंगाईगांव दिगम्बर जैन समाज के लोगों ने अपने अपने समय अनुसार स्वयं के घरों में किया। वहीं उन्होंने इसके सफल आयोजन के लिए सभी समाजजनों को धन्यवाद, साधुवाद व बधाई दी।समाज के वयोवृद्ध व भूतपूर्व अध्यक्ष महावीर सोगानी व समाज के सहसचिव रोहित छाबड़ा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कोरोना संकट के अंधकार को चुनौती देने के लिए किए गए आह्वान पर जैन समाज भी आगे बढ़कर आया व प्रत्येक जैन समाज के परिवार द्वारा एक चैन के माध्यम से अपने अपने घर में अखंड ज्योति जलाकर अपने समय अनुसार दीपक प्रज्ज्वलन कर आधे घंटे तक अखंड णमोकार में अपनी सहभागिता दी व भगवान का ध्यान किया।इधर, जैन समाज की महिला मंडल अध्यक्ष सुमित्रा सेठी मंत्री सुचित्रा पहाड़िया व उपाध्यक्ष निर्मला ठोल्या के द्वारा भी समस्त जैन धर्मावलम्बियों से नवकार मंत्र जाप का आह्वान किया गया। उन्होंने बताया कि सभी समाजजन घरों पर परिवार संग लॉकडाउन और सोशल डिस्टेन्सिग का पालन करते हुए इस अखंड णमोकार महामंत्र का जाप अपने अपने समय अनुसार किया। वहीं आज रविवार को अभयपुरी में रहने वाले तीन दिग्मबर जैन समाज के परिवारों ने 12 घंटे के णमोकार महामंत्र का जाप किया।


वहीं दिगम्बर जैन मन्दिर भवन परिसर में विराजमान राष्ट्र संत आचार्य 108 विराग सागर महाराज की परम प्रभावी शिष्या पूज्य आर्यिका विदुषी श्री माताजी ने ऑनलाइन संदेश देते हुए बताया किणमो अरिहंताणं,णमो सिद्धाणं,णमो आयरियाणं,णमो उवज्झायाणं,णमो लोए सव्व साहूणइस णमोकार मंत्र में विशिष्ट शुद्ध आत्मा को नमस्कार किया गया है। जिन्होनें अपने जीवन में अहिंसा को उतार लिया है तथा जिनकी सभी क्रिया अहिंसक है। यह आत्माएँ भारतीय और जैन संस्कृति की साक्षात प्रतिमा है। नमस्कार करने से हमारा जीवन आर्दश मय बन जाता है। शुद्ध आत्माओं का आर्दश सामने रखने से तथा शुद्धात्माओं के आर्दश का स्मरण, चिंतन और मनन करने से शुद्धत्व की प्राप्ति होती है, जीवन पूर्ण अहिंसक बनता है। अरिहंत, सिद्ध पूर्ण अहिंसक व परमात्मा बन गए है, आचार्य, उपाध्याय, साधु अहिंसक व परमात्मा बनने की प्रकिया है। ये पाँचो ही प्राणीमात्र के लिए उपकारी है। अपने जीवन में संयम, तपश्चरण द्वारा समस्त प्रणाओं का हित करते हैं।

इस मंत्र के माध्यम से तप और त्याग के मार्ग में आगे बढने की प्रेरणा मिलती है। तथा अहिंसा, अपरिग्रह को आचारण में उतारने की शिक्षा, विश्वबन्धुत्व और आत्मकल्याण की कामना उत्पन्न होती है। ये पाँचों आत्माएँ परम पद में स्थित है इसलिए इन्हें परमेष्ठी कहते हैं।
संसार में प्राणी मात्र शारीयिक, मानसिक, आर्थिक और अगंतुक दु:खोँ से दु खी है, इन दु:खों से बचने के लिए जैन धर्म में एक मास्टर चाँबी है जिसे णमोकार मंत्र के नाम से सब जानते हैं। णमोकार मंत्र को मास्टर चाँबी इसलिए कहते हैं क्यों की णमोकार मंत्र रुपी चाँबी से संसार के समस्त दु:खो को नाश किया जा सकाता है। णमोकार मंत्र में सम्पूर्णी द्वादशांक गर्भित है। णमोकार मंत्र चमत्कारी मंत्र है क्यों की इस मंत्र के ध्यान, स्मरण, पाठ, साधना और जाप से प्राणी मात्र दु:ख में भी सुख का अनुभव करने लग जाता है तथा वह कार्य भी सफलता हो जाता है जिसमें वह बार-बार असफलता हो रहा है। संसार, स्वर्ग और मोक्ष के सुख णमोकार मंत्र के स्मरण से प्राप्त किया जाता है। मनुष्य के जीवन में णमोकार मंत्र का उपयोग उसके जन्म से लेकर मोक्ष जाने तक की हर क्रिया में सर्व प्रथम किया जाता है। प्रतिदिन श्रद्धा से जाप करने वाले मनुष्य को दु:ख कभी आ ही नही सकता है। जितने भी मंत्र, ऋद्धि मंत्र व यंत्र है वह सब णमोकार मंत्र से ही निकले या बने है।

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