शांतिनाथ दिगंबर जैन बीसपंथी मंदिर में चातुर्मास की स्थापना हुई

शारीरिक दूरी के साथ, शरीर व आत्मा के अंतर को समझ कर करें धर्म साधना। उपाध्यायश्री उर्जयन्त सागरजी

AHINSA KRANTI NEWS

इंदौर:- (10 जुलाई) चातुर्मास अवधि में दिशाओं का बंधन कर संतों द्वारा आत्मसाधना की जाती है ताकि अहिंसा का पालन हो सके। कोरोना महामारी के इस समय में  शारीरिक दूरी के महत्व के साथ , शरीर व आत्मा की ज्यादा से ज्यादा समझ अपने अंदर में पैदा करें।
यह बात उपाध्याय श्री उर्जयन्त सागर जी महाराज ने शांतिनाथ दिगंबर बीसपंथी जैन मंदिर मल्हारगंज में चातुर्मास स्थापना के दौरान कही। आपने कहा कि इस तरह से धर्म साधना करेंगे तो प्रत्येक व्यक्ति का जीवन महान बन जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति कोरोना से बचने के लिए मुंह और नाक दोनों बंद कर रहा हैं वास्तव में झूठी शान रूपी नाक और बेबजह और अनर्थक बोलना व्यक्ति बंद कर दे तो संसार स्वर्ग बन जाएगा। समाज के संजीव जैन संजीवनी ने बताया कि सम्पूर्ण कार्यक्रम पंडित श्री नितिन झांझरी के निर्देशन में सादगीपूर्ण  सम्पन्न हुआ । 

प्रारम्भ में श्री प्रदीपकुमारसिंह कासलीवाल , श्री सुशील पांड्या,मनमोहन झांझरी व श्रीपाल जी टोंग्या के मुख्य आतिथ्य में ध्वजारोहण  किया गया । मुख्य चातुर्मास कलश प्राप्त करने का सौभाग्य श्री विकास कासलीवाल (इंद्र भवन) को प्राप्त हुआ । *दीप प्रज्वलन* श्री नरेश जी सेठी , श्री धनपाल जी टोंग्या ,श्री राकेशजी विनायका, श्री मनोज जी काला , *पादप्रक्षालन* श्री प्रतिपाल जी टोंग्या , श्री कुशलराज जी जैन , श्री राजेन्द्र जी सोनी , श्री पवन जैन , श्री कमल जी काला *शास्त्र भेंट* श्री शरद जी जैन द्वारा किया गया।

इस अवसर पर बड़वानी से पधारे  पुलक मंच के श्री पदम् जी काला का शाल श्रीफल से सम्मान किया गया *कार्यक्रम का संयोजन* व्यवस्थापक समिति के प्रमुख श्री भरत काला , श्री राजेश पांड्या , श्री अजयपाल टोंग्या ,  श्री महेंद्र सोनी , श्री विजय सेठी ,श्री अजय रावका , श्री महावीर पाटोदी ,श्री अशोक बड़जात्या , श्री रमेश बड़जात्या , हिन्दू वीर श्री प्रिन्सपाल टोंग्या , , श्री अनिल भोकाखेड़ी आदि ने किया । संचालन श्री धर्मेंद्र पाटनी ने व आभार श्री राजेश पांड्या ने माना । कलश स्थापना का सम्पूर्ण कार्यक्रम का लाइव प्रसारण श्री प्रवीण जैन द्वारा किया गया  जिसमें देश विदेश में मौजूद सभी भक्तों ने शामिल होकर पुण्यार्जन किया ।

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