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नागौर में नवकार महामंत्र का किया जाप

AHINSA KRANTI NEWS
नागौर। जयमल जैन महिला मंडल के तत्वावधान में जयगच्छाधिपति आचार्य पार्श्वचंद्र महाराज,डॉ.पदमचंद्र महाराज की  सुशिष्याएं जैन समणी सुगमनिधि एवं समणी सुधननिधि के सान्निध्य में शनिवार को दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक लोढ़ों की पोल स्थित छजमेल भवन में नवकार महामंत्र का जाप किया गया। इस दौरान श्राविकाओं ने मुहपत्ति पहनकर एवं सोशल डिस्टेनसिंग का पालन कर जाप किया। इस मौके पर मंडल अध्यक्ष पुष्पा ललवानी, मंत्री संगीता चौरड़िया, सांस्कृतिक मंत्री रीता ललवानी, कल्पना ललवानी, पांची देवी ललवानी सहित अन्य श्राविकाएं एवं बालिकाएं उपस्थित रहीं।
*नवकार महामंत्र की बताई महत्ता*
 समणी सुगमनिधि ने उपस्थित जनों को नवकार महामंत्र की महत्ता बताते हुए कहा कि धर्म सभी मंगलों में सर्वोत्कृष्ट मंगल है। नवकार मंत्र में पंच परमेष्ठी को सर्वप्रथम मंगल बताया गया है। मंगल का अर्थ होता है कि जो विघ्नों का नाश करें। अरिहंत ,सिद्ध ,आचार्य, उपाध्याय ,साधु इन पंच परमेष्ठी का श्रद्धा पूर्वक स्मरण करने से सभी विघ्न दूर हो जाते हैं। गुड़, दही ,अक्षत आदि द्वारा मंगल तो कभी अमंगल रूप भी हो सकते हैं ,लेकिन धर्म कभी अमंगल नहीं हो सकता है। धर्म ही सच्चा विघ्नहर्ता ,संकटमोचक ,विघ्न विनाशक ,बाधा निवारक एवं मंगल कारक होता है। धर्म के पुण्य प्रताप से सारे अड़चन, बाधा, अवरोध आदि दूर हो जाते हैं और हर कार्य में सफलता हासिल होती है। हर व्यक्ति जीवन में मंगल चाहता है ।
अतः उसके लिए धर्म का आलंबन लेना होगा। श्रद्धा एवं समर्पण के बल पर असंभव कार्य को भी संभव बनाया जा सकता है। धर्म के प्रभाव से दुख,कष्ट,रोग,शोक आदि दूर होने से धर्म पर व्यक्ति की श्रद्धा ओर ज्यादा बढ़ जाती है।
समणी सुधननिधि ने कहा कि संत दर्शन एवं उनके मुखारविंद से जिनवाणी श्रवण करने मात्र से अनंत पुण्य वाणी का उपार्जन होता है। संतों एवं महापुरुषों के सानिध्य में बैठने से उनके ओरे के प्रभाव से जीव को अमिट शांति की अनुभूति होती है। सत्संग एवं धर्म के महत्व को समझने वाला ही उसके प्रति रुचि रखते हुए उसे आचरण में उतारने हेतु तत्पर बन सकता है। समणी ने कहा कि श्रीपाल और उसकी पत्नी मैना सुंदरी को पंच परमेष्ठी के स्मरण के फल स्वरुप आध्यात्मिक लाभ के साथ भौतिक लाभ भी सहज प्राप्त हुआ। वीर पुरुष अकेले भी सिंहवत् अपने पराक्रम के बल पर अपना अस्तित्व कायम रखते हैं। कभी पराश्रित ना रहकर आत्म निर्भर बनना चाहिए।

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