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साध्वीजी के संयम दिवस की रजत जयंती पर की अभिवंदना

AHINSA KRANTI NEWS

बैंगलोर।  राजा राजेश्वरीनगर के तेरापंथ भवन में साध्वीश्री उज्जवलप्रभाजी तथा साध्वीश्री अनुप्रेक्षाश्री जी द्वय बहनों का संयम जीवन की रजत जयंती पर अभिवंदना एवं शुभ कामना के अवसर पर महिला मंडल के मंगलाचरण में भाई महाराज मुनि आलोक कुमारजी द्वारा प्रेसित गीतिका की प्रस्तुति दी। मुनि श्री देवार्य कुमारजी द्वारा प्रेसित गीतिका को अपने अलग ही अंदाज में श्री गुलाब बांठिया द्वारा संगान किया गया। सभा अध्यक्ष कमल जी दुगड़ ने अपने वक्तव्य एवं गीतिका के द्वारा भाव व्यक्त किये।

तेयुप अध्यक्ष श्री नरेशजी बांठिया ने द्वय साध्वियों के प्रति मंगल भावना प्रस्तुत की। गांधीनगर में विराजित साध्वीश्री अणिमा श्री जी तथा विजयनगर में विराजित साध्वीश्री मंगलप्रज्ञा जी द्वय बहनों ने भी आर आर नगर में विराजित भगिनी द्वय के प्रति संयम की रजत जयंती पर  अपनी मंगल कामनाएं प्रेसित की। साध्वीश्री अनुप्रेक्षाश्री जी ने अपने उद्बोधन में कहा- गुरु से ही अन्तरज्योति प्राप्त होती है, अन्तरज्योति प्राप्त करना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

साध्वीश्री उज्जवलप्रभाजी ने अपने मंगल प्रवचन में कहा – जीवन के अभ्युदय के क्षण गुरु कृपा से ही प्राप्त होते है। गुरु का मार्ग दर्शन ही जीवन को स्वस्थ एवं प्रशस्त बनाता है, मै अपने आपको सौभाग्यशाली मानती हूँ कि मुझे तुलसी-महाप्रज्ञ द्वय गुरुओं की सन्निधि में शिक्षित- दीक्षित होने का अवसर प्राप्त हुआ तथा आचार्यश्री महाश्रमणजी की अनुशासना में संयम जीवन में निर्मल एवं गतिशील बनी रहूँ। सभा, तेयुप व महिला मंडल के अनेक सदस्यों ने अध्यात्मिक भेंट स्वरुप तरह तरह की तपस्याओं का  त्याग पच्चखान किया। साध्वीश्री प्रबोध यशाजी ने द्वय साध्वियों की प्रति अपनी मंगल कामनाएं भेंट की। कार्यक्रम का सफल संचालन साध्वीश्री सन्मतिप्रभाजी द्वारा किया गया।

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