राजधानी के ब्रह्मचारी कोमलचन्द जी संपूर्ण जीवन शिक्षा और संस्कारों के लिये समर्पित किया अब चल पड़े मोक्ष मार्ग की ओर

0

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन 

भोपाल – सृष्टि का नियम है प्रत्येक संसारी जीव भौतिक सुख-सुविधायें और धन संपत्ति के लिये भागदौड़ करता रहता है और स्वयं के लिये खुशियां ढूंढता रहता है। वहीं सोनागिरी भोपाल निवासी कोमलचन्द जी और उनके परिवार ने दूसरों की मुस्कुराहट चेहरे पर लाने का हमेशा प्रयास किया। स्वयं 83 वर्षीय कोमलचंद जी ने उत्तम आचरण के साथ शासकीय शिक्षक के रूप में कई विद्यार्थियों का भविष्य बनाया और धर्मपत्नि श्रीमती कला देवी भी सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं। समाज के प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि आज जबलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के करकमलों से क्षुल्लक दीक्षायें हुईं। भोपाल निवासी ब्रह्मचारी कोमलचन्द जी ने आचार्य श्री के करकमलों से दीक्षित होकर क्षुल्लक वरदान सागर महाराज बने। सन् 1992 में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के सानिध्य में सागर में पंचकल्याणक महोत्सव में कोमलचंद जी और उनकी धर्मपत्नि कलादेवी जैन को भगवान के माता-पिता के पात्र बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ तभी से उनके जीवन में संसार का त्याग कर स्वयं का कल्याण करने के भाव उमड़े और आचार्यश्री से अजीवन ब्रह्मचार्य व्रत ले लिया। इसी समय उनकी पुत्री ब्रह्मचारिणी वंदना दीदी ने भी अजीवन ब्रह्मचारी व्रत अंगीकार किया। वंदना दीदी एम.ए., बीएड, एमएड करने के बाद पूर्व में सेन्ट्रल स्कूल में शिक्षिका के पद पर रहीं और जॉब छोड़कर इन्होंने मोक्ष मार्ग अपनाया और वर्तमान में प्रतिभास्थली जबलपुर में बालिकाओं को शिक्षा और संस्कारों की प्रेरणा दे रही हैं। 

कोमलचंद जी का संपूर्ण परिवार समाज के लिये मिसाल है। पूरे परिवार ने हमेशा शिक्षा के लिये तत्पर होकर समर्पित भाव से कार्य किया है। स्वयं कोमलचंद जी ने गृहस्थ अवस्था में अनेकों जिनालयों में वेदिका एवं प्रतिमायें विराजमान कराईं और अनेक शहरों में भारतीय संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण के लिए बच्चों की पाठशालायें खुलवाईं। इनके ज्येष्ठ पुत्र अयन कुमार जैन मेलबोर्न आस्ट्रेलिया बहुराष्ट्रीय कंपनी में उच्च पद पर रहते हुये धार्मिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इनकी धर्मपत्नि श्रीमती सपना जैन समाज के बच्चों के लिए शिक्षा और पाठशाला के लिए कार्य कर रही हैं। द्वितीय पुत्र डॉ. अतुल सिंघई स्वयं लेक्चरार है और कोरानोकाल में भोपाल वासियों के लिये खुले हृदय से राशन, दवाइयों की व्यवस्थायें करवाई। धर्मपत्नि श्रीमती उपासना सिंघई स्वयं स्कूल का संचालन कर रही हैं पुत्री श्रीमती अर्चना-सतीश जैन अनेक महिला संगठनों से जुड़कर सामाजिक सेवा के कार्य कर रही हैं। कोमलचंद जी के बड़े भाई 10 प्रतिमाधारी प्रेमचंद सिंघई का समाधिमरण कुंडलपुर में 2018 को हुआ था और इनके छोटे भाई हेमचंद जी ब्रह्मचारी देश के जाने-माने विद्ववान है और मुमुक्षु मंडल से जुड़कर अनेक धार्मिक और सामाजिक कार्य इनके प्रतिष्ठाचार्यत्व में होते हैं।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा,मध्यप्रदेश
संपर्क – 7828782835/8989696947

Leave A Reply

Your email address will not be published.