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घर घर मनाया गया श्री शांतिनाथ स्वामी भगवान का जन्म तप एवं मोक्षकल्याणक

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर)- जैन धर्म के १६ वे तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ स्वामी का जन्म तप एवं मोक्षकल्याणक संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के परम साधक शिष्य पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज एवं मुनि श्री अरह सागर जी महाराज जो कि मध्यप्रदेश के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ श्री कुन्डलपुर क्षेत्र में विराजमान है,

जिनवाणी चैनल के माध्यम से समूचे भारतवर्ष के लाखों श्रद्धालुओं ने प्रातःकालीन वेला में ६वजे से नव निर्माणाधीन वड़ेवावा भगवान श्री आदिनाथ स्वामी के मंदिर में मंगलाष्टक के साथ भगवान के चरणों का अभिषेक एवं शांतिधारा के पश्चात नित्यनियम पूजन अर्घ के उपरांत श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया गया।

इस अवसर मुनि श्री के मुखार विंद से सभी चारों वलय के अर्घ समर्पित किये गये। पर ब्र. श्री विमल भैयाजी गया ने अपनी स्वर लहरी के माध्यम से साढ़े तीन घंटे तक लाईव होकर घर घर में आज उपरोक्त उत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया।

श्री सकल दि. जैन समाज विदिशा के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया निर्वाण लाड़ू के पहले मुनि श्री के मुखार विंद से कोरोना रोग की शांति हेतु श्री शांतिनाथ महामंडल विधान “हे शांति प्रभु हे शांती प्रभु मेरे मन मंदिर में आओ” जैसे ही प्रारंभ हुआ नगर के सभी श्रद्धालुओं ने अपने अपने घरों पर टी.व्ही स्क्रीन के पास एक ऊंची चौकी पर जिनवाणी विराजमान कर एक पाटे पर श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का गोलाकार समवशरण की रचना कर चारों वलय के अर्घ समर्पित किये।

ईषान कोण में गृह में सुख शांति और समृद्धि के भाव से एक मंगल कलश की स्थापना एवं आग्नेय कोण में शुद्ध घी का दीपक जलाया गया। तत्पश्चात धुली दृव्य से अर्घ्यं समर्पित किये गये। १२८ वादाम के साथ प्रत्येक अर्घ पर वह वादाम मंडल पर चढ़ाई गई।

श्री जैन ने वताया कि मुनि श्री ने भगवान श्री शांतिनाथ स्वामी का विधान घर घर में कराकर विश्व में फैल रहे इस कोरोना रोग की शांति के लिये २२ मार्च से ॐ हीं जगत शांतिकराय श्री शांतिनाथाय नमःसर्व उपद्रव शांती कुरू कुरू स्वाहा का जाप अनुष्ठान कराया जा रहा है, इसमें पूरे भारत वर्ष के लाखों श्रद्धालुओं ने इस महायज्ञ को करके अपना योगदान दिया।

नगर के श्रद्धालुओं ने वताया कि भले ही मंदिर वंद हों लेकिन मुनि श्री ने सभी श्रद्धालुओं को टी.व्ही चैनल के माध्यम से लाईव पूजन विधान और जाप अनुष्ठान के साथ निर्वाण लाड़ चड़वा कर इस पाप के काल में पुण्य अर्जित कराने में अपना योगदान दिया।

ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

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