जब आपकी आस्था डगमगा जाती है,तो वंहा पर धर्म की विरादना ही होती है – मुनि श्री…

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा - किसी कार्य को संपन्न करते समय अनूकूलता की प्रतीक्षा करना सही पुरूषार्थ नहीं है, कारण कि जो कुछ भी घट रहा है,वह राग

अपना विकास करना चाहते है, वह अपने आपको लघुतम तथा सामने बाले को गुरूतम मानते है –…

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा - जब तक आप अपने आपको लघु नहीं मानोगे तब तक गुरूतम नहीं वन सकते,आजकल कोई अपने आपको लघुतम मानना ही नहीं चाहता क्यू कि

पिच्छिका अहिंसा, करूणा और दया की परिचायक है – मुनिश्री संस्कार सागर जी महाराज

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन भोपाल - आचार्यश्री विराग सागर महाराज के शिष्य मुनिश्री संस्कार सागर महाराज का पिच्छिका परिवर्तन श्री शांतिनाथ जिनालय परिसर

दीपावली का त्योहार प्राणिओं का संहार करके न मनाऐं – मुनि श्री सौम्य सागर जी

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा - जिस प्रकार से अंग्रेजों ने जलियाँवाला बाग नरसंहारकांड कर मानवीयता को छार छार किया था उसी प्रकार आप लोग दीपावली के

प्रशंसा के भूखे योग्यता से कंगाल होते है – मुनि श्री सौम्य सागर जी महाराज

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा - एक किसान समयोचित समय में जब योग्य वीज को योग्य खाद पानी के साथ वो देता है,तो जब वह अंकुरित होता है तो अपने माथे पर

“जैसी संगति मिलती वैसी मती होती है” -मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा - सत्ता शास्वत होती है सम्भावनाएं प्रतिसत्ता में होती है आचार्य गुरुदेव मूक माटी के माध्यम से आत्मा और पर्याय की

अतिनद्रिय ज्ञान भी तभी आ सकता है,जब जितेन्द्रिय ज्ञान आपके अंदर प्रवेश कर जाता है –…

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा - व्यक्ती बाहर से कुछ और अंदर से कुछ और होता है,जो वह अंदर से है उसे वह छुपाना चाहता है,और बाहर से जो दिख रहा है उसे

श्री चौबीस तीर्थंकर महामंडल विधान में श्रद्धालुओं ने जगत कल्याण की भावना और विश्व शांति के…

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन भोपाल - श्री पार्श्वनाथ जिनालय शंकराचार्य नगर में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनिश्री संभव सागर महाराज, मुनिश्री

बच्चों से मित्रतापूर्ण व्यवहार करना चाहिये – मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा - ज्ञानी दर्द को सहता है,ओर सोचता है कि में सिद्ध कब वनूंगा जबकि अज्ञानी दर्द में अपनी इस देह को नष्ट करना चाहता है,

हम यदि अनंत को प्राप्त करना चाहते है, तो वर्तमान में जीना होगा वर्तमान को कभी भूलना नहीं…

अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन विदिशा - छोटे छोटे झरने जो कि मौसमी हुआ करते है, वह अक्सर वहूत आबाज करते है,और सूख जाया करते है,लेकिन जो नदियाँ धीरे