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विदिशा(भद्दलपुर) नगर में दो मुनि संघ का आगमन व मिलन

सोशल डिस्टेंस का दिखा सख्ती से पालन

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन

विदिशा(भद्दलपुर)-मुनि श्री समता सागर जी महाराज एवं ऐलक श्री निश्चयसागर जी महाराज का मंगल प्रवेश ईदगाह चौराहे से प्रशासनिक व्यवस्था में विना माईक विना गाजेबाजे के शोसल डिस्टेंस के साथ पुलिस के घेरे में पुलिस एनाउंसमेंट के साथ  प्रातःकालीन वेला में हुआ।

प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया मुनिसंघ  गुलाब वाटिका- डंडापुरा- वड़ा वाजार- तिलकचौक- निकासा होते हुये माधवगंज स्थित श्री शांतिनाथ जिनालय स्टेशन जैन मंदिर प्रस्थान किया यंहा पर मुनि श्री का 1992 में चातुर्मास के साथ नौ माह तक लगातार प्रवास रहा था, 

इसके पश्चात श्री महावीर जिनालय किरीमौहल्ला, के दर्शन कर पुन्हा खरीफाटक रोड़ से श्री शांतिनाथ जिनालय सराफ जी का मंदिर, श्री आदिनाथ जिनालय पाटनी जी का मंदिर, की वंदना करते हुये अरिहंत विहार गेट पर मुनि श्री कुंथुसागर जी एवं ऐलक श्री सिद्धांतसागरजी, क्षु. श्री ध्यानभूषण सागर जी महाराज तथा विद्यासागर नवयुवक मंडल ने उनकी मंगल अगवानी की।

हालांकि विदिशा नगर ने एतिहासिक अगवानी तो वहूत की है, लेकिन कोरोना काल में शोसल डिस्टेंस के साथ 20 साल वाद मुनि श्री पधारे तो विदिशा के भक्तगण मुनि श्री के चरण वंदना और पाद प्रछालन का सौभाग्य भले न ले पाए हों लेकिन अपने अपने घर के सामने श्रद्धा का थाल सजाए मंगल आरती कर अपने आपको सौभाग्यशाली मान रहे थे,

कोई दूर से खड़े अपनी पलकों से अपने प्रिय गुरु का दर्शन अपने हाथों को श्रीफल वनाए वंही से नमोस्तू कर रहे थे, और गुरू भी अपनी वही चिर परिचित मुस्कान के साथ सभी को आशीर्वाद प्रदान कर रहे थे।

मुनि श्री के दर्शनार्थ विदिशा के कलेक्टर डा. पंकज जैन आई ए. एस, एस डी एम गोपाल सिंह वर्मा, सी. एस.पी विकास पांडे, नायब तहसीलदार पारुल जैन उपस्थित रहे एवं अरिहंत विहार जैन मंदिर के सभाकक्ष में मुनिसंघ को नमोस्तु निवेदित किया।

इस अवसर पर मुनि श्री ने अपने संक्षिप्त उदवोधन में सभी को आशीर्वाद प्रदान करते हुये कहा कि जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के सभी अधिकारी एवं पुलिसकर्मियों ने आज लगभग ४ कि. मी का शहरी क्षेत्र का विहार कुशलतापूर्वक कराया। उन्होंने पुलिस प्रशासन एवं जिला प्रशासन के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आशीर्वाद प्रदान किया। 

व्यवस्था में लगे खातेगांव से लगभग 200 कि. मी का विहार करा रहे जम्वु कुमार सेठी, प्रमिला सेठी, संगीता सेठी, सीमा  पांडया, प्रोफेसर डा. अभय जैन एवं विहार में चल रहे नेमावर के सभी भैया जी को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। श्री सकल दि. जैन समाज और श्री शीतल विहार न्यास के पदाधिकारीओं ने उनको प्रशस्तिपत्र साल श्री फल और तिलक लगाकर सम्मान किया।

इस अवसर पर मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने संक्षिप्त प्रवचन में कहा कि जैसै मिट्टी के भविष्य के लिए जैसे कुम्हार का महत्व है, ठीक वैसे ही समाज के भविष्य के लिए गुरु का महत्व है, उन्होंने कहा कि एक कुम्हार मिट्टी से चिलम भी बना देता है और उसी मिट्टी से कुम्हार कुंभ  रुप भी प्रदान करता है। चिलम और कुंभ में स्वभाव में वहूत बड़ा फर्क है,जैसे कुम्हार  के विचार बदलने से उस माटी का संसार  बदल जाता है, उसी प्रकार गुरुओं के योग्य सानिध्य में समाज की नई पीढ़ी जागरूक और जबाबदार बनती है।

उन्होंने कहा कि  विदिशा नगर में आज दो मुनि संघों का आगमन हुआ है, यह विदिशा वासियों के लिए सौभाग्य की बात है यहां पर समाज ने संघ के आगमन पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए द्वार द्वार से जो भक्ति का प्रदर्शन किया वह बहुत बड़ा आदर्श है। समाज आज की परीक्षा में 100% सफल रही, 100% नंबर पाने में समाज के लिए प्रशासन का भी वहूत बड़ा सहयोग रहा यहां के प्रशासन ने समय और परिस्थिति को देखकर के जो व्यवस्थाएं की उसके लिये उनको बहुत-बहुत आशीर्वाद। प्रशासन का यह सहयोग हमेशा आदर्श के रूप में याद किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि विश्व शांति के सूत्रों को विदिशा ने सदैव प्रदान किया है इतिहास को याद करते हुये कहा कि भगवान शीतलनाथ से लेकर के सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य अशोक एवं कुषाण वंश के राजाओं ने गुप्त वंश के महान सम्राटों ने शांति के सूत्र को प्रकाशित करने के लिए विदिशा को केंद्र बनाया था और इसी विदिशा से जैन धर्म की प्रभावना की ध्वजा आचार्य समन्तभद़ स्वामी ने वनाई थी। सन्  2014 में परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने इस ध्वजा को और ऊंचाई प्रदान की।

इस अवसर पर मुनि श्री कुंथु सागर जी महाराज ने कहा कि विदिशा नगर में मेरा चातुर्मास हो चुका है ,और आप सभी हमसे परिचित ही है।अपनी दीक्षा को याद करते हुये मुनि श्री ने कहा कि उस दीक्षा का संचालन तो मुनि श्री समतासागर जी ने ही किया था और आज पुनः एक अवसर उनसे मिलने का आया है।

मुनि श्री समता सागर जी इस वर्ष की धर्म प्रभावना को गगनचुंबी बनाएंगे, ऐसी मेरी पवित्र भावना है एवं मेरा सोच यह है कि यह चातुर्मास वर्षायोग समता सागर जी महाराज जी के सानिध्य में विदिशा नगर का एक नया इतिहास रचेगा। मुनि श्री समता सागर जी कवि हृदय है एवं जीवन शैली को दिशा देने वाले एक महान संत हैं, इन संत के सानिध्य में रहकर कि हर कोई अपना जीवन अहिंसा पथ पर शांति पथ पर और समृद्धि पथ पर ले जा सकता है यह मेरा विश्वास है।

 इस अवसर पर मुनिसेवक संघ के सभी सदस्यों जिन्होंने भी विहार कराने में योगदान दिया उन सभी को एवं श्री विद्यासागर नवयुवक मंडल के सभी युवाओं, को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। २१ जून रविवार को मुनिसंघ के मंगल प्रवचन प्रातःकालीन वेला में ८:३० से अरिहंत विहार जैन मंदिर में होंगे।

~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

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