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क्रोध आग है और अहंकार डीजल -आचार्य मणिप्रभ

AHINSA KRANTI NEWS
मांडवला 14 जुलाई 2020
श्री जिनकांतिसागरसूरि स्मारक ट्रस्ट एवं जहाज मंदिर चातुर्मास समिति-2020 द्वारा आयोजित चातुर्मास के अंतर्गत हुए जहाज मंदिर परिसर के प्रवचन हॉल में आयोजित पूज्य खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन इच्छाओं के आधार पर नहीं अपितु समझौते के आधार पर चलता है। जीवन में यदि शांति और आनंद चाहिये तो दूसरों की इच्छाओं पर अपनी इच्छाओं का बलिदान करना सीखो। जो व्यक्ति दूसरों को सुख देने के लिये अपना सुख त्याग करता है, निश्चित रूप से वही व्यक्ति पूरे परिवार के हृदय में बिराजमान होकर राज करता है।
आज पारिवारिक शांति के सूत्र प्रस्तुत करते हुए पूज्यश्री ने कहा- जीवन में यदि आनंद पाना है तो टिट फोर टेट का सिद्धान्त अपने मन से निकालना होगा। जैसे को तैसा नहीं अपितु जैसे को वैसा सिद्धान्त बनाना होगा। जैसे को तैसा का अर्थ हुआ कि जैसा वो कर रहा है, वैसा करना। जबकि जैसे को वैसा का अर्थ होता है, वह जो कर रहा है, वो भले करे पर मुझे वो करना है जो उसके और मुझे दोनों के अनुकूल हो। हमें आग का जवाब डीजल या पेट्रोल से नहीं अपितु पानी से देना चाहिये।
उन्होंने कहा- क्रोध आग है और अहंकार डीजल! क्रोध का जवाब क्रोध या अहंकार में भर कर नहीं, अपितु क्षमा और सरलता रूप पानी से देना होगा। तभी वातावरण में तनाव समाप्त होगा।
आचार्य जिनमनोज्ञसूरीश्वर महाराज ने धर्मसभा के प्रारंभ में संबोधित करते हुए कहा कि- हर व्यक्ति को अपने व्यवहार की समीक्षा करनी चाहिये । मैं जो भी करता हूं, बोलना, बैठना, चलना, करना आदि जो भी मेरी प्रवृत्ति है, उसका परिणाम मेरे लिये क्या होगा और साथ साथ इस बात का विचार करना भी जरूरी है कि मेरे व्यवहार का परिणाम मेरे परिवेश पर क्या होगा। उन्होंने कहा- व्यक्ति जंगली/ एकाकी प्राणी नहीं है, वह समाज में जीता है । समाज का अर्थ होता है । व्यक्ति जो भी करता है, निश्चित रूप से संपूर्ण समाज उससे प्रभावित होता है । उन क्षणों में यह विचार जरूरी है कि मैं सामाजिक परिणामों पर भी विवेक पूर्वक विचार करके अपने व्यवहार को संतुलित बनाउॅ ।
आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी से शुरू चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में आचार्यश्री का प्रतिदिन प्रवचन सुबह 9.30 से होगा। सभा में चातुर्मासिक दिनचर्या की घोषणा के अनुसार स्वाध्याय कक्षा, 10.30 बजे से संस्कृत कक्षा आदि होंगे।
प्रवचन में पारसमल बरडिया, महावीर बोहरा, सरूप जैन, मुकेश प्रजापत आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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