जैन आयोजन

अक्षय तृतीया पर बारां में घर घर मे परिवार सहित किया भक्तामर पाठ


अहिंसा क्रांति / अमित जैन


बारां । नर्सिया मंदिर में विराजमान आचार्य 108 ज्ञान सागर जी महाराज ने आज अक्षय तृतीया आखा तीज का भारतीय संस्कृति में बड़ा महत्व है विभिन्न धर्म वाले इस  आखातीज को वह शुभ मुहूर्त मानते हैं जैन  दर्शन के अनुसार आखा तीज में महामुनि  आदिश्वर का दीक्षा लेने के बाद 6 महा तक उपवास किया 6 माह तक आहार की विधि ना मिली आज के दिन हस्तिनापुर में राजा श्रेयांश के पूर्व में उन्होंने मुनिराज को आहार दिया उसका जाति स्मरण हुआ और माहमुनिराज का पड़गाहन नवधा भक्ति से किया और आज के दिन ही इक्षु रस गन्ने का रस से प्रथम आहार उस  दिन से अक्षय तृतीया को दान दिवस के रूप में जाने जाने लगा आज का पर्व उदारता का त्याग का पर्व है आज का पर्व न्याय नीति से अर्जित कमाई का सही उपयोग मध्यम पात्र उत्तम पात्र जगन पात्रों को दान देकर गरीब विद्यार्थियों को उनकी पीस किताबें व  जो भी गरीब लोग हैं इस कोरोना वायरस के कारण परेशान हैं

उनके भोजन की व्यवस्था करना जो पशु पक्षी है उन सब के आहार पानी भोजन  का ध्यान रखना वह जो अहस्य व्यक्ति हैं गरीब है उन लोगों की सहायता करना अपनी न्याय नीति  से संचित संपत्ति का कुछ ना कुछ परोपकार के कार्यो में  सेवा के कार्यो में  समाज में कार्यों में उसका उपयोग करना विशेष रुप से अपनी भावना को विशुद्ध बनाये  परिणामों को नरम बनाएं राजा श्रेयांश ने आज महामुनी आदिश्वर को  आहार दान देकर दान की परंपरा चलाई और कुछ ना कुछ अपनी  इनकम में से दान दें दान को गुप्त दान सबसे श्रेष्ठ दान है चार प्रकार के दान जैन धर्म में बताए गए हैं आहार दान और ओषधि दान शहस्त्रः दान अभय दान  निश्चय से तो हम राग देष मोह आदि का त्याग करना श्रेष्ठ दान हे व्यवहार से अपने जीवन में न्याय नीति से अर्जित कमाई से दान देकर प्रशंसा की अनुमति होनी चाहिए दान देकर अहंकारी नहीं बनना चाहिए दान एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है मानसिक शांति उदारता के लिए दान का बड़ा महत्व है इस  लिए हर व्यक्ति को अपनी आय का कुछ न कुछ दान करना चाहिए।

Related Articles

Back to top button
Close