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प्रत्येक धर्म में अहिंसा को प्रधानता दी है उसको जीवन जीने का अधिकार है-मुनि श्री समता सागर जी महाराज

यूट्यूब लाइव के माध्यम से ऑनलाइन चल रही क्लास व प्रवचन

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति /ब्यूरो चीफ देवांश जैन
विदिशा(भद्दलपुर) – पूज्य मुनि श्री समतासागर जी महाराज का लाईव प्रवचन यू टियूव चैनल पर चल रहा है। समय प्रतिदिन8:30 से9:15 तक एवं 15 मिनट आपकी जिज्ञासाओं का समाधान किया जाएगा।
कोई भी सर्वोच्च शक्ती सत्ता कभी यह नहीं कहती कि हम तुम्हारी हिंसा से खुश होंगे,सभी धर्म अहिंसा को  पसंद  करते है, प्रत्येक धर्म में अहिंसा को प्रधानता दी गई है। प्रत्येक जीव जीना चाहता है, वह मरना नहीं चाहता है, उसको जीवन जीने का अधिकार है,
उपरोक्त उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने विदिशा नगर के शीतलधाम में यू टियूव लाईव में प्रवचन देते हुये रक्षाबंधन पर्व की कथा को सुनाते हुये कहे। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर्व कथा को सुनाते हुये कहा कि हालांकि वर्तमान में पशु वली पर सरकार ने अंधश्रद्धा मानते हुये हिंसात्मक पृवृति पर रोक लगाई है। लेकिन आज भी चोरी छिपे यह जीव हिंसात्मक कार्य चलते चले आ रहे है। और कल जो सामुहिक हिंसा हुई है उसके लिये भी कई लोगों ने जाप अनुष्ठान किये होंगे।
उन्होंने कहा कि 28 मूल गुणों का पालन करने वाले मुनिराजों के साथ 36 मूल गुणधारी अकंपनाचार्य का  चातुर्मास चल रहा था। वह चारो दुष्ट मंत्रिओं ने राजा पदमराज से छल पूर्वक 7 दिन का राज्य हांसिल कर लिया और वदले की भावना से यज्ञ के वहाने वड़े वड़े यज्ञ मंडप तैयार कर वंहा पर पशुओं की वली दी जाने लगी।
चारों ओर विसाक्त वातावरण तैयार कर दिया गया। मनुष्यों के हाथों से राज राक्षसों के हाथों में चला गया
समस्त700 मुनिराजों ने इसे उपसर्ग मानकर एक सीमा वनाकर सल्लेखना वृत धारण कर  उपसर्ग काल तक सल्लेखना धारण कर ली। और आहार जल का त्याग कर दिया।  इस उपसर्ग को अवधिज्ञानी मुनि सारचंद्राचार्य मुनि जो कि मिथलानगरी में विराजमान थे उन्होंने रात्री में श्रवण नक्षत्र को हिलते ढुलते देखा तो चोंक गये
उन्होंने अवधिज्ञान के माध्यम से अकंपनाचार्य आदि700 मुनिराजों का घोर उपसर्ग को जानकर, पुष्पदंत नाम के छुल्लक जी को उपसर्ग दूर करने के लिये विक्रिया रिद्धी धारी विष्णुकुमार मुनि जो कि “धरणीभूषण पर्वत” पर साधना कर रहे थे, वह ही उपसर्ग को दूर कर सकते है उन्होंने कहा कि रिद्दियां तप के प्रभाव से आती है
लेकिन विद्याऐं सिद्ध हो जाती है और यह सिद्धी क्षुल्लक आदि रख सकते है, और उस काल में ऐसे विद्याधर हुआ करते थे और क्षु. पुष्पदंत जी विद्या के माध्यम से उपसर्ग को टालने के लिये वह विष्णु कुमार मुनि के पास पहुंचे।
और उन्होंने पूरी जानकारी देते हुये हस्तिनापुर में हो रहे उपसर्ग की जानकारी दी मुनि विष्णु कुमार को भी नहीं मालुम था कि उनको विक्रिया रिद्दी प्राप्त हो गयी है। उन्होंने प्ररक्टिकल किया तो वह सीधे हस्तिनापुर राजा पदमराय जो कि उनके गृहस्थ अवस्था के भाई थे
उन्होंने कहा कि आपके राज्य में इस प्रकार से मुनिराजों पर उपसर्ग तो उचित नहीं है। तो राजा पदमराज वोले कि ये पापी मंत्रिओं 7 दिन का राज्य दे चुका हुं।
आप ही कुछ कर सकते है। और विष्णु कुम्मकार मुनि ने एक वटुक व्राह्मण का रुप वनाकर यज्ञशाला में पहुंचे और वली राजा को प्रसन्न कर लिया और उनसे तीन पग भूमी मांगी। मंत्री वली जो राजा वने थे उन्होंने उस गरीब व्राह्मण को तीन पग भूमी का संकल्प जल छोड़  दिया।
वचन लेंने के पश्चात उन्होंने अपना वृहद रुप धारण कर लिया कि ज्योतिष पटल तक छू गया पहले पग में सुमेरु पर्वत  दूसरे पग में मानुषोत्तर पर्वत को माप लिया। अर्थात ऊपर नीचे ढाई दीप की पूरीभूमी नाप ली, अब कोई भी भूमी नही वची,तो विष्णु कुमारी ने कहा कि तीसरा पग कंहा रखूं। वली समझ गया और अपने प्राण वचाने की भीख मांगी।
विष्णुकुमार मुनि ने अपना वृहद रूप को शांत करते हुये उस दुष्टात्मा को क्षमा करते हुये पदमराज को उसका राज वापिस दिलाकर 700 मुनिराजों का उपसर्ग दूर कराया।एवं चारों मंत्रिओं ने सभी मुनिराजों ने क्षमा मांगी। और उपसर्ग दूर किया। एवं मुनि विष्णुकुमार ने भी आगे चलकर घोर तपस्या की और केवल्यज्ञान को प्राप्त किया। इसलिये उपरोक्त पर्व धर्म और धर्मायतनों की रक्षा का मनाया जाने लगा।
उपरोक्त जानकारी देते हुये  प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया कि वर्तमान समय में कोरोना रोग के कारण सभी को शीतलधाम पर आने की मनाही है। यह समय अपने आपको सम्हलने और सम्हालने का है। सभी लोग वाजार में भी यदि जरूरी है तो ही जाऐ, और एक दूसरे से डिस्टेंस कायम रखें। उन्होंने शांतिमंत्रों के साथ सभी जीवों को शांति मिले एवं कोरोना रोग से नगर में जो लोग भी प्रभावित हुये हें वह सभी स्वस्थ हों और फिर से अपनी जीवन धारा  में आ सकें।
~ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश
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