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रात के बाद उजियारा यही जिंदगी का सच है : देवेंद्रसागरसूरि

AHINSA KRANTI NEWS

आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरीश्वरजीने राजाजीनगर के अपने धर्म प्रवचन में कहा की युवाओं में बढ़ता मानसिक तनाव इस दृष्टि से चिंताजनक है कि कई बार वह तनाव से मुक्ति पाने के लिए मौत को भी गले लगाने से नहीं चूकते। जरा सी नाराजगी, सहनशक्ति का अभाव, घरेलू कलह तथा भावनाओं में बहकर खुदकुशी जैसे कदम उठाना युवाओं में अब कोई नई बात नहीं रह गई है। पिछले  दिनों में मुंबई में फ़िल्मी अभिनेता द्वारा खुदकुशी कर लिया जाना इस बात का द्योतक है। प्रतिस्पर्धा के इस युग में हर व्यक्ति की कोशिश होती है कि वह किसी मुकाम तक पहुंचे। असफल रहने पर उनमें कुंठा इस कदर हावी हो जाती है।

कई मामलों में बेरोजगारी, गरीबी व घरेलू कलह भी एक कारण होता है। लेकिन इन सबसे छुटकारा पाने के लिए आत्महत्या जैसा कदम उठाना कोई हल नहीं है।वे आगे बोले  रात के बाद उजियारा यही जिंदगी का सच है। समाज को तनाव मुक्त बनाने के लिए माता-पिता का यह दायित्व बनता है कि बच्चों को उतना ही स्नेह दें जिसमें वह बिगड़ें न। इसके अलावा बच्चों की संगत पर भी विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। कई बार अपेक्षाओं पर खरा न उतरने पर छात्र आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते है। प्रतिस्पर्धा के इस युग में माता-पिता की बच्चों के प्रति अपेक्षाएं बढ़ी हैं जो गलत हैं। माता-पिता को भी समझना होगा और उन पर किसी प्रकार का मानसिक दबाव बनाने से बेहतर होगा कि बच्चे को अपना भविष्य स्वयं चुनने दें। यह खुशी की बात है कि पिछले कुछ वर्षो से विद्यार्थियों की सोच में काफी बदलाव आया है और अब वह केवल डॉक्टर व इंजीनियर ही नहीं बनना चाहते बल्कि उनका लक्ष्य इससे भी काफी आगे है।

किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उम्र कभी भी आड़े नहीं आती। ऐसे में युवा जिंदगी में असफल भी रहते हैं तो उनमें हीन भावना नहीं आनी चाहिए। सत्त प्रयासों से ही कामयाबी आपके कदम चूमती है। धर्म के रास्ते पर चलते हुए अपने दुख के दिनों को धीरज के रास्ते बीतते हुए देखें। जीवन अवधि, सुख-दुख, धन, विद्या मनुष्य के जन्म से पहले ही निश्चित होता है। इसलिए न तो इनके बारे में चिंता करनी चाहिए और न भटकना चाहिए। फिर भी सब कुछ भाग्य के भरोसे नहीं छोड़ देना चाहिए।‘कर्मण्येवाधिकारस्ते’ को ध्यान में रखते हुए सदा कर्म करते रहना चाहिए। परेशानियों को हमेशा सबक की तरह लें, प्रकृति आपको सिखाना चाहती है। परीक्षा लेती है। कितने खरे उतरते हो। इस रोल के लिए आपको चुना गया है। आप चाहें तो टूटकर बिखर जाएं, आप चाहें तो निखर जाएं। अपनी ऊर्जा को सही दिशा दें। जब आप इस अहसास से भरे होंगे कि आपके आस-पास इतने सारे लोग, सब उस सर्व-शक्तिमान के अंश हैं, सिर्फ शरीर रूपी आवरण की वजह से भटके हुए हैं। तब आप किसी के साथ अन्याय नहीं कर पायेंगे।

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