जैन समाचार

जयमल जैन पौषधशाला में की जा रही पर्वाधिराज पर्युषण की आराधना

अंतगड दसा सूत्र का किया जा रहा वांचन

AHINSA KRANTI NEWS


जैन धर्म का सबसे उत्तम पर्व- पर्युषण 15 अगस्त से प्रारंभ हुआ। श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में आचार्य जयमल जैन मार्ग स्थित जयमल जैन पौषधशाला में 8 दिवसीय पर्वाधिराज पर्युषण की आराधना की जा रही है। इस दौरान जयमल जैन पौषधशाला में प्रतिदिन प्रातः 8:30 से 9:30 बजे तक अंतगड दसा सूत्र का वांचन किया जा रहा है। पर्यूषण पर्व के दौरान विशेष रुप से इस सूत्र का स्वाध्याय किया जाता है। इसके पठन-पाठन और मनन से हर भव्य जीव को अंत क्रिया की प्रेरणा मिलती है, अतः यह परम कल्याणकारी ग्रंथ है। सभी उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को पुष्पा ललवानी द्वारा प्रभावना वितरित की गयीं।

इस मौके पर प्रकाशचंद बोहरा, प्रेमचंद चौरड़िया, नरपतचंद ललवानी, दिलीप पींचा, नरेश गुरा, जयेश पींचा आदि श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहें। कई श्रावक-श्राविकाएं कोरोना महामारी के चलते अपने निवास पर ही धर्माराधना कर रहे है।सूर्यास्त पश्चात हो रहा प्रतिक्रमणपर्वाधिराज पर्युषण पर दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक जयमल जैन पौषधशाला में कल्प सूत्र एवं चौपाई का वांचन किया जा रहा है। इस दौरान प्रतिदिन सूर्यास्त पश्चात प्रतिक्रमण किया जा रहा है। संघ मंत्री हरकचंद ललवानी ने बताया कि पुरुष वर्ग का प्रतिक्रमण जयमल जैन पौषधशाला में चल रहा है।

वहीं, महिला वर्ग का प्रतिक्रमण घोड़ावतो की पोल स्थित रावत स्मृति भवन में हो रहा है। इस दौरान सोशल डिस्टेनसिंग,मास्क आदि प्रशासन के निर्देशों का पूर्णतया पालन किया जा रहा है। श्रावक-श्राविकाओं द्वारा एकासन,बियासन, उपवास,आयंबिल आदि तपस्या की जा रही है। संघ प्रवक्ता संजय पींचा ने बताया कि 19 अगस्त को आचार्य सम्राट शुभचंद्र महाराज का द्वितीय स्मृति दिवस तप-त्याग,जप-जाप एवं जीव दया के कार्य कर मनाया जाएगा। वहीं,22 अगस्त को संवत्सरी महापर्व मनाया जाएगा।

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