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आचार्य प्रसन्न सागर महाराज का पारणा महोत्सव 17 अगस्त को

AHINSA KRANTI NEWS

मंशापूर्ण महावीर तीर्थ क्षेत्र मुरादनगर (यू पी) में चातुर्मासरत अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज का लगातार 48 वॉ उपवास है। गुरुदेव के अनन्य भक्त चन्द्र प्रकाश बैद ने जानकारी देते हुए बताया कि आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज ने दिगम्बरत्व सन्त समाज मे तप,त्याग और तपस्या की नई इमारत लिखी है अंतर्मना गुरुदेव ने भगवान महावीर के पश्चात अखंड मोन पूर्वक सिंह निस्क्रीडित व्रत की साधना की जिसमे गुरुदेव ने 186 दिन की मोन साधना करते हुए 153 उपवास किये थे। पूज्य श्री ने अपने दीक्षा काल के 31 वर्षों में 3000 से ज्यादा उपवास की कठिनतम साधना की जिसमे 64 दिन,48 दिन,32 दिन,16 दिन एवं 10 दिन के लगातार उपवास कर चुके है।

गुरुदेव देश के 32 राज्यो में अहिंसा संस्कार पदयात्रा के माध्यम से 90000 किलोमीटर से भी ज्यादा की पद विहार यात्रा तय कर चुके है।शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखर जी तीर्थ क्षेत्र की अंतर्मना गुरुदेव ने एक दिन में 8 वन्दना करके गौरव प्राप्त किया है।गुरुदेव 48 उपवास के पहले भी एक दिन आहार एक दिन उपवास की व्रत साधना कर रहे थे जो पारणे के बाद भी रहेगी।अभी वर्तमान में गुरुदेव की 48 उपवास की मोन पूर्वक साधना का पारणा महा महोत्सव 17 अगस्त को धूमधाम से मनाया जाएगा।पारणा महा महोत्सव के पूर्व  16 अगस्त को प्रात: 6 बजे से 17 अगस्त की प्रात: 6 बजे तक लगातार 24 घण्टे सौम्य मूर्ति पीयूष सागर जी महाराज के निर्देशन में भक्ताम्बर पाठ का आयोजन किया जा रहा है जिसमे देश विदेश के समस्त अनुयायी 24 घण्टे में 1 लाख भक्ताम्बर का पाठ करेंगे।विगत 23 जुलाई को गुरुदेव के 51 वे अवतरण दिवस पर गुरु भक्तों ने 24 घण्टे में 70 लाख मंत्रों का जाप कर कीर्तिमान बना दिया जो एशिया बुक ओर इंडिया बुक में दर्ज किया गया है इससे पहले भी गुरुदेव को अनेकों उपाधियों से विभूषित किया जा चुका है।


अंतर्मना को प्राप्त उपाधियां:-
साधना से सर्जन के सोपान एवं वाणी के सलिल प्रवाह के अधिपति होने के नाते अंतर्मना गुरुदेव को विभिन्न उपाधियों से विभूषित किया गया है।गुजरात शाषन द्वारा महामहिम राज्यपाल ओ.पी.कोहली के कर कमलों से गुरुदेव को साधना महोदधि की उपाधि से विभूषित किया गया। विश्व की सबसे बड़ी राखी रक्षासूत्र नामक कार्य ,कृत्य एवं लेखन के लिये वियतमान विश्व विद्यालय की मानक उपाधि से सम्मानित किया गया जो सम्पूर्ण भारत के लिए गौरव का विषय है। ब्रिटेन की संसद में सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था द्वारा आपको भारत गौरव की उपाधि से विभूषित किया। आपके गुरु आचार्य पुष्पदंत सागर जी महाराज ने आपको तपाचार्य की उपाधि से विभूषित किया।गुरुदेव का नाम इंडिया बुक रिकॉर्ड,एशिया बुक रिकॉर्ड एवं गिनीज बुक रिकॉर्ड में दर्ज है।

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