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संयम जीवन का सुरक्षा कवच है, संयम के वल पर हम अपनी आत्म शक्तीओं को उदघाटित कर सकते है-मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति/ब्यूरो चीफ देवांश जैन

सागर-संयम जीवन का सुरक्षा कवच है, संयम के वल पर हम अपनी आत्म शक्तीओं को उदघाटित कर सकते है। उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने लाईव चैनल के माध्यम से व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि संयम हमारे धर्मी होंने का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मन, वाणी, व्यव्हार और भोजन पर नियंत्रण होंना आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि मन का संयम होंना चाहिये मन के संयम के साथ वचन पर भी संयम रखना आवश्यक हैं।


उन्होंने कहा कि हम सभी भाग्यशाली हैं जो हमारे पास वाकशक्ति हैं। इस धरती पर कई प्राणी ऐसे है, जिनके पास वोलने की ही शक्ती ही नही है और कुछ प्राणी ऐसे हें जिनके पास वोलने की शक्ती तो है लेकिन भाषा शक्ती नहीं है।


लेकिन मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जिसके पास वोलने की भी शक्ती हैं और भाषा की शक्ती भी हैं।उन्होंने कहा कि आपने कभी अपना मूल्यांकन किया? मानलीजिए आपको जोर से प्यास लगी हैं, और आपके पास करोड़ो रूपया सामने पड़ा हो लेकिन आपके पास वोलने की शक्ती न हो तव आपको वाक शक्ती का महत्व महसूस होगा।


उन्होंने कहा कि वोलने की जो शक्ती तुमने पाई है उसका कभी दुरुपयोग मत करना। महापुरुषों के जीवन में शालीनता, मधूरता, सत्यता और विनम्रता झलकती हैं।उन्होंने नाली का पानी और नल के पानी का अंतर वताते हुये कहा कि जैसे नल का पानी प्यास वुझाता हैं, वंही नाली का पानी वदवू मारता हैं। उसी प्रकार आपके वचन है आप देखिये कि आपके मुंह से कैसे शव्द निकल रहे हैं?
वचनों के प्रहरी वनो और देखो कि आपके मुख से कैसे शव्द निकल रहे हैं।


जो व्यक्ती अपने शव्दों को सम्हाल कर मधुर और हितकारी शव्दों को वोलता है वही सभी का प्रिय वन जाता हैं। मुनि श्री ने कहा कि अपने शव्दों के प्रहरी वनो और यदि किसी से कोई गलत शव्द निकल जाते हैं, तो अपनी निंदा और गरहा करना चाहिये, और पश्चाताप होंना चाहिये। जिससे आपके द्वारा भविष्य में कभी खोटे वचन न निकलें। और यदि फिर भी अनर्गल शव्द निकलें तो पश्चाताप करो और अपने ऊपर स्वं का वंधन लगाओ कि यदि मेरे मुख से अपशव्द निकलेंगे तो में प्रति अपशव्द के लिये जितनी वार भी वह अपशव्द निकलेंगे उतनी वार मंदिर में १० रुपये की पेनाल्टी दूंगा।


मुनि श्री ने कहा कि आप लोग जो पृवृति करते है एक तो वुद्धी पूर्वक होती हैं और दूसरी अवुद्धी पूर्वक होती हैं। जो वाक्य वुद्धी पूर्वक हम वोलते हैं उसको तो कंटरोल में किया जा सकता हैं, लेकिन जो लोग अवुद्धी पूर्वक वोलते है उनको भावनायोग का सहारा लैना चाहिये।


वचनों पर संयम लाना हैं तो आप इन शव्दों को वार वार दौहराए,” कम वोलो” “मीठा वोलो,”धीरे वोलो, यह संस्कार जव आपके अवचेतन मन में वैठ जाऐंगे तो आपको आपके वचनों पर नियंत्रण हो जाऐगा।


उन्होंने कहा कि जिन वचनों से औरों को संताप पहुंचे वह वाचिक हिंसा हैं। मुनि श्री ने कहा कि कई लोग ऐसे है जो कि तीखा और अनर्गल वोलते हैं, औरवह क्रोध में और जोर जोर से वोलते है, उनसे पूछो ऐसा क्यों करते हो ?


तो वह कह देते हैं में कंहा वोलता हूं यह तो मेरी भाषा है, मुनि श्री ने कहा कि जिस व्यक्ती ने भाषा ही क्रोध की वना ली हो उसकी भाषा कभी नही सुधर सकती। उन्होंने महाभारत की वात करते हुये कहा कि द्रौपदी की एक वचन अंधे के अंधे ही होते हैं इसमें महाभारत को खड़ा कर लिया। वह महाभारत तो 18 दिन में खत्म हो गई लेकिन आपके घर में तो उन वचनों के कारण रोज महाभारत हो जाती हैं।

उन्होंने कहा वाणी में एसी शक्ती है कि जो एक दूसरे को मित्र वना दे, वंही वांणी का तीखापन एक दूसरे का दुश्मन वना देता हैं। उन्होंने कहा कि कभी कभी आप लोगों का वांणी संयम मंदिर में भी दिख जाता हैं।

मुनि श्री ने कहा कि मंदिर में भी अशांति जिसके पास संयम नहीं होता वह देश काल और स्थान को भूल जाता हैं, मुनि श्री ने कहा कि भावना योग के माध्यम से आप अपने जीवन में परिवर्तन ला सकते है, उन्होंने कहा कि संपूर्ण भारत इस समय लांक डाउन के दौर से गुजर रहा हैं, एवं जैन समाज में कई परिवार ऐसे भी होंगे जो इस लांकडाउन से प्रभावित हुये है ऐसे परिवारों को गुणायतन समूह ने मदद करने का निश्चय किया है।

उन्होंने कहा कि जैन समाज के लोग काफी स्वाभीमानी होते है, वह कष्टों को सह तो लेते हैं लेकिन किसी से कहते नहीं, हम सभी लोगों को चाहिये इस लांकडाउन के समय में कोई भी परिवार भूखा न रहे और उनके घर पर राशन सामग्री पहुंचाने की व्वयस्था चुपचाप करना हैं।

मुनि श्री के इस आव्हान के पश्चात गुणायतन समूह की ओर से जैन समाज के कमजोर वर्ग के लिये जो कि लांकडाउन में वेरोजगारी का सामना कर रहे हैं, वह गुणायतन समूह के उपरोक्त नं पर संपर्क स्थापित करें। उनकी सभी जानकारी गोपनीय रखी जाएगी। 7739396148, 09006702989 , 9450037469 9425171401 इन मोवाईल नं पर अपने वाटस्एप के द्वारा आधार प्रति के साथ प्रस्तुत करें।

श्री सकल दि. जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया विदिशा नगर के गुणायतन समूह के सदस्यों ने इस और सहयोग करने की अपील की हैं। श्रीसकल दि. जैन समाज विदिशा द्वारा अरिहंत विहार जैन मंदिर में चल रही भोजनशाला में आज के भोजन की व्यवस्था जैन शोसल ग्रुप द्वारा की गयी ग्रुप के अध्यक्ष श्री प्रदीप जैन और राजेश जैन ने भोजनालय पहुंचकर अपने हाथों से लगभग 800 पैकेट तैयार करवाऐ एवं उसका वितरण में सहयोगी वने।

ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

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