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पामर से पामर व्यक्ती भी अपने संस्कारों में परिवर्तन कर भगवान वन सकता है और वना हैं मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज

मध्यप्रदेश अहिंसा क्रांति/ब्यूरो चीफ देवांश जैन

सागर-राजा हो या रंक सव पर है, कोरोना का डंक कोई नहीं वचा उससे इसलिये सभी को सावधानी रखना आवश्यक हैं। मुझे जैसी जानकारी है साऊदी अरब के साही परिवार पर 150 लोगों पर संकट छा गया

इसलिये तिनके की भी उपेक्षा मत करो। व्यक्ती घृणित नहीं होता, व्यक्ती से घृणा मत करो व्यक्ती के कर्म से घृणा करो पापी से पापी व्यक्ती का भी हृदय परिवर्तन हो सकता है।

इसलिये किसी की भी उपेक्षा मत करो भगवान महावीर कहते है कि पाप त्याज्य है, लेकिन पापी नहीं, अंजन भी निरंजन वन सकता है यह भी एक उदाहरण है, इसलिये आचार्य गुरूदेव हमेशा कहते है कि पाप से घृणा करो पापी से नही

उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने चैनल के माध्यम से कहे। उन्होंनै कहा कि जीवन को वेहतर वनाने के लिये किसी का भी तिरस्कार न करें। उन्होंने कहा कि अपने आप को विशेष मत मानो जिन्होंने अपने आपको विशेष माना वह शेष हो गये।

इसलिये समता का भाव अंतरंग में आना आवश्यक है  तिरस्कार तो किसी का भी नही होंना चाहिये। पामर से पामर व्यक्ती भी अपने संस्कारों में परिवर्तन कर भगवान वन सकता है और वना हैं।

उन्होंने कहा कि हम सभी मंगल भावना के साथ अपने जीवन का मार्ग प्रसस्थ करें।  उन्होंने फिर एक वार जैन समाज से कहा कि सभी लोग अपने अपने घरों पर ही रहें, शासन प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

विदिशा जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन ने वताया कि मुनि श्री प्रतिदिन जांप अनुष्ठान के साथ जगत में कोरोना का संताप मिटे इसलिये प्रतिदिन मंगल भावनायोग करवा रहे हैं।

ब्यूरो चीफ देवांश जैन (विदिशा) मध्यप्रदेश

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